नई दिल्ली: मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष अब एक भीषण हवाई युद्ध में बदल गया है. अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का हवाला देते हुए आई रिपोर्टों से पता चलता है कि ईरान के खिलाफ अभियानों के दौरान अमेरिकी वायु सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. न केवल दुश्मन के हमलों से बल्कि तकनीकी खराबी और समन्वय की कमी के कारण भी. रिपोर्टों के अनुसार संघर्ष की शुरुआत के बाद से कम से कम 16 अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हो गए हैं. इस संख्या में बेहद महंगे ड्रोन और रीफ्यूलिंग टैंकर भी शामिल हैं.
युद्ध की शुरुआत से अब तक 10 MQ-9 रीपर ड्रोन नष्ट हो चुके हैं. इनमें से नौ को उड़ान के दौरान ईरानी हवाई रक्षा प्रणालियों द्वारा मार गिराया गया. एक ड्रोन जॉर्डन के एक एयरफील्ड पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले की चपेट में आ गया, जबकि दो अन्य तकनीकी खराबी का शिकार हो गए.
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन ड्रोनों को जानबूझकर उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में तैनात किया जाता है क्योंकि ये मानवरहित होते हैं. जिसके वजह से मानवरहित विमानों की तुलना में इनके नष्ट होने को कम गंभीर नुकसान माना जाता है.
रिपोर्ट में सबसे दुखद पहलू तकनीकी विफलताओं और परिचालन त्रुटियों के कारण हुआ नुकसान है. एक मिशन के दौरान एक KC-135 रीफ्यूलिंग टैंकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी छह क्रू सदस्यों की मौत हो गई.
इस बीच कुवैत में 'फ्रेंडली-फायर' यानी अपनी ही सेना द्वारा गलती से हमला की एक घटना के कारण तीन अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान मार गिराए गए. यह अपनी ही सेना द्वारा पहचान में हुई गलती का मामला था. यह घटना उस गंभीर समन्वय की कमी को उजागर करती है जो उच्च-दबाव वाले युद्ध के माहौल में उत्पन्न हो सकती है. इसके अलावा सऊदी अरब में स्थित एक अड्डे पर ईरानी मिसाइल हमले के दौरान पांच अन्य KC-135 विमानों को नुकसान पहुंचा.
आमतौर पर अमेरिकी वायु सेना किसी भी संघर्ष में हवाई वर्चस्व हासिल कर लेती है. हालांकि ईरान के मामले में यह एक चुनौती साबित हो रहा है. अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि हवाई हमलों में उनकी परिचालन प्रभावशीलता केवल स्थानीय स्तर तक ही सीमित है. जिसका अर्थ है कि पूरे ईरानी हवाई क्षेत्र पर उनका नियंत्रण नहीं है. हाल ही में एक अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान को ईरानी हमले में क्षतिग्रस्त होने के बाद आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी. सौभाग्य से पायलट सुरक्षित निकलने में कामयाब रहा.