नई दिल्ली: ईरान और इजरायल के बीच अप्रैल की शुरुआत में सीजफायर शुरू होने के बाद ईरान ने अपना मिसाइल हमला इजरायल पर किया है. इस हमले के बाद से फिर से जबरदस्त लड़ाई शुरू होने का डर पैदा हो गया है. ऐसे में शांति वार्ता पर भी मुश्किलों के बादल मंडरा रहे हैं. बता दें कि इजराइल ने लेबनान में बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर बिना किसी चेतावनी के हमले किए, जिसके बाद ईरान की तरफ से यह हमला किया गया.
अमेरिका ने इजरायल से संयम बरतने के लिए कहा था. वहीं, ईरान ने यह वादा किया था कि अगर इजरायल ने हमले जारी रखे तो वो भी जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. ईरान ने पुष्टि कर बताया है कि उसने मिसाइलें दागी हैं. वहीं, उसे उम्मीद है कि इजरयल जवाबी कार्रवाई करेगा. इस आशंका को देखते हुए उसने पश्चिमी एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) बंद कर दिया है. पड़ोसी देशों इराक और सीरिया ने भी सुरक्षा के लिहाज से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया.
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमले जारी रहे तो जवाब दिया जाएगा. साथ ही कहा गया है कि पूरे क्षेत्र में सभी अमेरिकी और इजराइली हितों को निशाना बनाएंगे. इस बयान में लेबनान, ईरान के तट और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास संभावित हमलों का भी जिक्र किया गया है.
इजरायली सेना ने कहा कि उसने तीन फेजे में ज्यादातर मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया है. साथ ही कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया गया है. इजराइली अधिकारियों ने कहा है कि वो हमले का कड़ा जवाब दिया है. सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा, "ईरान ने गंभीर गलती की है."
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल को सलाह दी है कि वो जवाबी कार्रवाई न करे. इजराइल के सार्वजनिक प्रसारक कान और अमेरिकी समाचार आउटलेट एक्सियोस के अनुसार, ट्रंप ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कहा कि वे जवाबी कार्रवाई न करें. उन्होंने इजराइल से कूटनीतिक बातचीत के लिए और समय देने को कहा. सिर्फ यही नहीं, ट्रंप प्रशासन ने यह भी कहा कि उसने बेरूत में इजराइल के हालिया हमले के लिए अनुमति नहीं दी थी.