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'अगर समझौता होता है तो...', ईरान के संवर्धित यूरेनियम पर ट्रंप का बड़ा बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान के साथ समझौता होता है तो दोनों देश मिलकर संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करेंगे और यदि समझौता नहीं होता तो अमेरिका सैन्य दबाव बनाए रखेगा.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'अगर समझौता होता है तो...', ईरान के संवर्धित यूरेनियम पर ट्रंप का बड़ा बयान
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. ट्रंप ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत समझौते के करीब पहुंच सकती है. उन्होंने कहा कि यदि सहमति बनती है तो अमेरिका और ईरान मिलकर ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम को हटाकर नष्ट करेंगे. वहीं, यदि कोई समझौता नहीं होता है तो अमेरिका अपने सैन्य विकल्प खुले रखेगा. ट्रंप के इस बयान को क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने में करेंगे मदद

ट्रंप ने कहा कि संभावित समझौते की स्थिति में अमेरिका अपनी तकनीक और संसाधनों की मदद से ईरान के संवर्धित यूरेनियम को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने में सहयोग करेगा. उनके अनुसार यह प्रक्रिया दोनों देशों की सहमति से पूरी की जा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि समझौता सफल नहीं होता, तब भी अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि यह सामग्री किसी खतरे का कारण न बने. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी निगरानी प्रणाली इतनी उन्नत है कि ईरान की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकती है. उन्होंने अंतरिक्ष आधारित तकनीक और निगरानी क्षमताओं का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है.

ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि बातचीत में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है. उनके अनुसार ईरान पहले ही यह स्वीकार कर चुका है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा. हालांकि ट्रंप इससे आगे की गारंटी चाहते हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी नए समझौते में यह स्पष्ट होना चाहिए कि ईरान न केवल परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा, बल्कि उन्हें खरीदने, हासिल करने या किसी अन्य तरीके से प्राप्त करने की भी अनुमति नहीं होगी. ट्रंप का मानना है कि इस तरह की शर्त भविष्य में किसी संभावित विवाद को रोकने में मदद कर सकती है.

ईरान का नया नेतृत्व समझदार है

ट्रंप ने ईरान के नए नेतृत्व के बारे में भी अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि वर्तमान नेतृत्व पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक और समझदारी से काम करता दिखाई दे रहा है. उन्होंने संकेत दिया कि वार्ता प्रक्रिया में नए नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और यदि आवश्यकता हुई तो वह सीधे संवाद के लिए भी तैयार हैं. ट्रंप ने यह भी कहा कि लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी और अविश्वास को समाप्त करना आसान नहीं है, लेकिन बातचीत के जरिए समाधान तलाशा जा सकता है. उनके अनुसार दोनों देशों के संबंधों में बदलाव आने में समय लग सकता है.

अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की योजना नहीं

ट्रंप ने साफ किया कि फिलहाल क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की कोई योजना नहीं है. उनका कहना है कि जब तक स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं हो जाती तब तक अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बनी रह सकती है. उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता पहले की तुलना में काफी कमजोर हुई है लेकिन सावधानी बरतना अभी भी जरूरी है. ट्रंप ने यह भी कहा कि संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है. उनके मुताबिक यदि स्थायी समझौता हो जाता है तो तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है और क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता लौटने की संभावना बढ़ जाएगी. साथ ही उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा.