“ड्रेगन” एक बार फिर हदें पार कर रहा है. जी हां, दलाई लामा के मुद्दे को लेकर चीन ने भारत की चेतावनी दी है. अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर अवैध कब्जे का दावा करने वाला चीन अब कह रहा है- दलाई लामा के मामले से दूर रहो, यह हमारा आंतरिक मामला है. चीन-तिब्बत के धर्मगुरु 14वें दलाई लामा करीब 66 वर्षों से भारत में शरण लिए हुए हैं. अब चीन को इसलिए उनकी याद आ रही है, क्योंकि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन होना है.
चीनी दूतावास ने बयान जारी कर कहा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन हमारा घरेलू मामला है, भारत को इसमें नहीं पड़ना चाहिए. इतना ही नहीं दूतावास ने इस बात भी नाराजगी जाहिर की है कि भारत की धरती का इस्तेमाल तिब्बत की आजादी की मांग करने वाले कर रहे हैं. दूतावास का कहना है कि भारत को ऐसा कतई नहीं होने देना चाहिए.
इस मामले में चीन के प्रवक्ता यू जिंग की ओर से भी एक बयान जारी किया गया है. उन्होंने अपने अधिकारिक बयान में कहा है कि भारत दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन में दखल न दे, यह चीन का आंतरिक मामला है. चीन ने कहा है कि दलाई लनामा के उत्तराधिकारी का चुनाव करने की अनुमति चीन ही देता है. सदियों पुरानी परंपराओं का निर्वहन करते हुए उत्तराधिकारी चुना जाता है. हमे इसे दलाई लामा का पुनर्जन्म मानते हैं और इसमें कोई बाहरी हस्तक्षेप हमारी परंपराओं के खिलाफ है.
इस बीच चीन ने कहा है कि सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन कोई संप्रभु देश नहीं है, इसलिए उसे दलाई लामा के उत्तराधिकार की प्रक्रिया पर दावा करने का कोई हक नहीं है. चीनी प्रवक्ता ने कहा कि भारत आगे से तिब्बत की आजादी से जुड़ी गतिविधियों के संचालन का कोई मौका नहीं देगा और दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया में दखल देने से परहेज करेगा. चीन ने कहा कि यदि भारत इन प्रतिबद्धताओं का पालन करता रहेगा तो दोनों देशों के आपसी संबंध बेहतर होने में मदद मिलेगी.
दरअसल चीन के भड़कने की असल वजह यह कि 14वें दलाई लामा खुद कह चुके हैं कि उनके उत्तराधिकारी के चयन में चीन की कोई भूमिका नहीं होगी. उन्होंने कई बार सार्वजनिक तौर पर कहा है कि उनका उत्तराधिकारी किसी लोकतांत्रिक देश से भी हो सकता है. पिछले साल दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन की घोषणा के बाद से चीन दलाई लामा के रुख के चलते परेशान है.