नई दिल्ली: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ अहम शांति वार्ता शुरू होने वाली है. इससे ठीक पहले, ईरान के अंदर एक गहरा आपसी टकराव सामने आया है. ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचे. इस बीच गालिबफ, विदेश मंत्री अब्बास अराकची और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं.
IRGC के कमांडर-इन-चीफ अहमद वाहिदी टीम में गालिबफ और अराकची के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं. वाहिदी ने प्रतिनिधिमंडल में IRGC के पूर्व कमांडर मोहम्मद बाकर जोलगद्र को शामिल करने के लिए कहा है. इ करने के लिए जोरदार दबाव डाला है. मौजूदा टीम इस कदम का कड़ा विरोध कर रही है. टीम का कहना है कि जोलगद्र के पास इतनी संवेदनशील बातचीत के लिए पर्याप्त कूटनीतिक एक्सपीरियंस नहीं है.
बता दें कि ईरान में IRGC बेहद पावरफुल हो गया है. अब यह देश की अर्थव्यवस्था और समाज के बड़े हिस्से को कंट्रोल भी कर रहा है, जिससे यह ईरानी राजनीति में एक प्रमुख शक्ति बनकर उभरा है. इस्लामाबाद में जो बातचीत होने वाली है वो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच पहली बड़ी सीधी बातचीत है. ऐसे में यह काफी अहम मानी जा रही है. पाकिस्तान इस बातचीत में एक अहम रोल अदा कर रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर को लेकर पहले से ही काफी तनाव है.
ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत से पहले अहम शर्ते रखी हैं. वह चाहता है कि सीजफायर में लेबनान को भी शामिल किया जाएगा. उस पर और हमले न किए जाएं. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के तहत जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को रिहा किया जाए. ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अपने मिसाइल कार्यक्रम पर चर्चा नहीं करेगा.
वहीं, दूसरी तरफ, अमेरिका ने तेल टैंकरों के लिए होर्मुज को पूरी तरह से खोलने की बात कही है और ऐसा न करने पर ईरान की कड़ी आलोचना भी है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान बहुत खराब काम कर रहा है. साथ ही चेतावनी दी है कि यह संघर्ष-विराम समझौते के खिलाफ है.