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India Daily

भारत को कल से छूट मिले, अगर...टैरिफ पर व्हाइट हाउस के सलाहकार ने दिया ऑफर

ब्लूमबर्ग टेलीविजन के कार्यक्रम बैलेंस ऑफ पावर के साथ एक साक्षात्कार में व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत से प्रभावित संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि शांति का मार्ग कुछ हद तक नई दिल्ली से होकर गुजरता है.

Gyanendra Sharma
भारत को कल से छूट मिले, अगर...टैरिफ पर व्हाइट हाउस के सलाहकार ने दिया ऑफर
Courtesy: Social Media

India us trade deal: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते खराब हैं. इस बीच व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो ने टैरिफ को लेकर भारत को एक ऑफर दिया है. उन्होने दावा किया कि भारत द्वारा रियायती दर पर रूसी तेल खरीदने से मास्को की आक्रामकता बढ़ी है और अमेरिकी करदाताओं पर बोझ पड़ा है. उन्होंने कहा कि यदि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर दे तो उसे अमेरिकी टैरिफ में 25% की छूट मिल सकती है.

ब्लूमबर्ग टेलीविजन के कार्यक्रम बैलेंस ऑफ पावर के साथ एक साक्षात्कार में व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत से प्रभावित संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि शांति का मार्ग "कुछ हद तक नई दिल्ली से होकर गुजरता है.

नवारो की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाया गया 50% टैरिफ बुधवार से प्रभावी हो गया है यह कदम पश्चिमी दबाव के बावजूद रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखने के लिए भारत को दंडित करने के लिए उठाया गया है.

भारत को कल 25% की छूट मिल सकती है

जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका भारत के साथ बातचीत कर रहा है और क्या टैरिफ को समायोजित करने की कोई संभावना है तो व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो ने जवाब दिया, "यह वास्तव में आसान है. भारत को कल 25% की छूट मिल सकती है, यदि वह रूसी तेल खरीदना बंद कर दे और युद्ध मशीन को चलाने में मदद करे." उन्होंने यह भी कहा, "मैं हैरान हूं. क्योंकि मोदी एक महान नेता हैं. यह एक परिपक्व लोकतंत्र है और इसे परिपक्व लोग चला रहे हैं."

ब्लूमबर्ग के अनुसार, नवारो ने टैरिफ पर भारत के रुख पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे जो बात परेशान कर रही है, वह यह है कि भारतीय इस मामले में बहुत अहंकारी हैं. वे कहते हैं, 'ओह, हमारे पास उच्च टैरिफ नहीं हैं. ओह, यह हमारी संप्रभुता है. हम जिससे चाहें तेल खरीद सकते हैं."

युद्ध में आर्थिक मदद देने का आरोप लगाया

नवारो ने भारत पर मास्को के युद्ध प्रयासों को आर्थिक मदद देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "रूस से तेल कम कीमत पर खरीदकर, रूस उससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अपनी युद्ध मशीनों को और ज़्यादा यूक्रेनियों को मारने में लगाता है." उन्होंने आगे कहा, भारत जो कर रहा है, उससे अमेरिका में हर कोई हार रहा है. उन्होंने तर्क दिया कि इसकी लागत अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ती है: "उपभोक्ता, व्यवसाय और हर चीज़ को नुकसान होता है, और श्रमिकों को भी नुकसान होता है क्योंकि भारत के उच्च टैरिफ के कारण हमें नौकरियां, कारखाने, आय और उच्च वेतन का नुकसान होता है. और फिर करदाताओं को भी नुकसान होता है क्योंकि हमें मोदी के युद्ध का वित्तपोषण करना पड़ता है."

उन्होंने आगे कहा, भारत हमें सामान बेचकर जो पैसा कमाता है, उसका इस्तेमाल वह रूसी तेल खरीदने में करता है, जिसे फिर रिफाइनर प्रोसेस करते हैं और वहां वे खूब पैसा कमाते हैं. रूसी इस पैसे का इस्तेमाल हथियार बनाने और यूक्रेनियों को मारने में करते हैं.