India Armenia Arms Deal: भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा सहयोग बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है. वर्ष 2020 के बाद से भारत ने आर्मेनिया को हथियारों की आपूर्ति में बड़ा इज़ाफा किया है. इसका कारण सिर्फ सैन्य व्यापार नहीं, बल्कि तुर्की, पाकिस्तान और अजरबैजान के मजबूत होते गठबंधन का जवाब देना भी है. यह त्रिकोणीय गठबंधन भारत की रणनीतिक सुरक्षा के लिए खतरा बनता जा रहा है.
आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी है. दोनों के बीच नागोर्नो-काराबाख को लेकर कई युद्ध हो चुके हैं. वहीं, अजरबैजान को तुर्की और पाकिस्तान का खुला समर्थन प्राप्त है. तुर्की और अजरबैजान ने हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव में पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया था. इसके जवाब में भारत ने आर्मेनिया को अत्याधुनिक हथियारों से सशक्त करना शुरू किया.
भारत ने आर्मेनिया को ‘आकाश-1एस’ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम और होवित्जर तोपें देने की योजना बनाई है. 2022 की डील के तहत पहली खेप नवंबर 2023 में दी जा चुकी है और दूसरी जल्द भेजी जाएगी. इससे आर्मेनिया की सैन्य क्षमता में बड़ा उछाल आएगा.
2020 के काराबाख युद्ध में रूस की निष्क्रियता से आर्मेनिया में निराशा फैली थी. दोनों देश CSTO सैन्य गठबंधन के सदस्य हैं, लेकिन रूस ने सहयोग नहीं किया. इससे आर्मेनिया अब भारत और अमेरिका जैसे देशों की ओर झुक गया है. विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत अब रूस की जगह एक बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बनता जा रहा है.
राजन कोचर ने कहा, 'तुर्की और अजरबैजान के साथ भारत के रिश्ते अच्छे नहीं हैं... ऐसे में भारत को आर्मेनिया को हथियार देने से कोई झिझक नहीं है.' वहीं, विश्लेषक क्रिस ब्लैकबर्न मानते हैं कि 'भारत की मिसाइल बिक्री तुर्की के एर्दोगन द्वारा पाकिस्तान के समर्थन का सीधा जवाब है.'
भारत ने तुर्की ड्रोन के पाक में इस्तेमाल पर सख्त ऐतराज जताया है. देश में तुर्की-अजरबैजान उत्पादों के बहिष्कार की लहर है. हाल ही में भारत सरकार ने सुरक्षा कारणों से तुर्की की कंपनी सेलेबी को एयरपोर्ट संचालन से भी हटा दिया.