menu-icon
India Daily

'पाकिस्तान हुआ फेल तो अब ब्रिटेन ने संभाली कमान', स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के लिए 35 देश हुए एक साथ

मिडिल ईस्ट युद्ध को शांत करवाने में अब ब्रिटेन मुख्य भूमिका में नजर आ रहा है. आज यानी गुरुवार को 35 देशों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के लिए एक साथ मंच साझा किया है.

shanu
Edited By: Shanu Sharma
'पाकिस्तान हुआ फेल तो अब ब्रिटेन ने संभाली कमान', स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के लिए 35 देश हुए एक साथ
Courtesy: X (@mslaggert)

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण पूरे विश्व में ऊर्जा संकट बढ़ता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण ईधन सप्लाई चेन टूट गया है. इसी बीच पाकिस्तान के बाद अब ब्रिटेन मुख्य भूमिका में नजर आ रहा है. आज यानी गुरुवार को लगभग 35 देशों ने वर्चुअल बैठक की. इसका मुख्य लक्ष्य ईरान-इज़राइल-अमेरिका संघर्ष के कारण लगभग बंद हो चुके होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही को बहाल करना है.

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने पुष्टि की कि विदेश सचिव यवेट कूपर की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में सभी संभावित कूटनीतिक और राजनीतिक विकल्पों पर चर्चा होगी. बैठक का फोकस तीन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रीत है. जिसमें जलमार्ग को सुरक्षित रूप से फिर से खोलना, वहां फंसे चालक दल के सदस्यों को निकालना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बहाल करना.

होमुर्ज खुलवाने की कोशिश

ईरान द्वारा लगातार दी जा रही चेतावनी और कुछ हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर आवाजाही पूरी तरह से रुक गई है. फारस की खाड़ी को खुला समुद्र से जोड़ने वाला यह मार्ग दुनिया के तेल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा संभालता है. इसके बंद होने से ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिसका असर विकासशील देशों पर सबसे अधिक पड़ रहा है. हालांकि खास बात यह है कि अमेरिका इस बैठक का हिस्सा नहीं बना. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि होर्मुज की सुरक्षा अब अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है. 

अमेरिका फर्स्ट नीतिके बीच यूरोपीय और एशियाई देश आगे

व्हाइट हाउस में राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि हमारे पास घरेलू तेल और गैस के पर्याप्त भंडार हैं. जो देश इस मार्ग पर निर्भर हैं, उन्हें अपना तेल खुद सुरक्षित करना चाहिए. ट्रंप के इस रुख ने यूरोपीय और एशियाई सहयोगी देशों पर भारी दबाव बढ़ा दिया है. इस संयुक्त बैठक में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, जापान और संयुक्त अरब अमीरात समेत 35 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान से अपील की है कि वह जलमार्ग को बाधित करने वाले अपने प्रयासों को तुरंत रोक दे.

इन देशों ने सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने के लिए ठोस योगदान देने का संकल्प लिया है. हालांकि, फिलहाल कोई भी देश सैन्य बल का इस्तेमाल कर मार्ग को जबरन खोलने को तैयार नहीं है. ईरानी सेना के पास मिसाइल, ड्रोन, सुरंगें और हमलावर नौकाओं का बड़ा जखीरा है. यूरोपीय नेता इसे ट्रंप प्रशासन के अमेरिका फर्स्ट दृष्टिकोण के बीच अपनी स्वतंत्र क्षमता दिखाने का मौका मान रहे हैं. अब आने वाले समय पता चलेगा कि उनकी कितनी मेहनत सफल रही.