नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता के बीच राजनीतिक विश्लेषक इयान ब्रेमर ने बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप बातचीत के नाम पर समय खरीद रहे हैं और संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं.
ब्रेमर के अनुसार ट्रंप का असली लक्ष्य ईरान के तेल केंद्र खर्ग द्वीप पर नियंत्रण हासिल करना हो सकता है. यह वही स्थान है जहां से ईरान अपने करीब 90 प्रतिशत तेल का निर्यात करता है.
उन्होंने कहा कि ट्रंप फिलहाल बातचीत के जरिए बाजार को स्थिर रखने और तेल की कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं. जब तक अमेरिकी सैनिक पूरी तरह तैनात नहीं हो जाते, तब तक ये वार्ता जारी रह सकती है.
हालांकि ब्रेमर ने यह भी माना कि यह सैन्य विकल्प आसान नहीं होगा और इसके गंभीर आर्थिक परिणाम सामने आ सकते हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ट्रंप शायद हालात को शांत करना चाहते हैं क्योंकि अमेरिका में उन पर घरेलू दबाव बढ़ रहा है.
उनकी ये टिप्पणियां तब आईं जब US उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद के रास्ते में थे, जबकि एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी अगले 24 घंटों में होने वाली सीजफायर वार्ता के लिए पाकिस्तान रवाना हो चुका था.
ब्रेमर ने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ेगा. खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
उन्होंने कहा कि ट्रंप पूरी तरह युद्ध नहीं चाहते और पहले भी उनके कई सख्त बयान ज्यादा प्रभावी नहीं रहे हैं. उनका मानना है कि बड़े स्तर पर युद्ध होने की स्थिति में क्षेत्र में व्यापक जवाबी कार्रवाई हो सकती है, जिसे अमेरिका टालना चाहता है.
ईरान की भूमिका पर बात करते हुए ब्रेमर ने कहा कि वह बातचीत में शामिल तो होगा लेकिन ज्यादा रियायतें देने की संभावना कम है. उन्होंने कहा कि असली फैसले अमेरिका के हाथ में हैं क्योंकि इस संघर्ष की दिशा वही तय कर रहा है.
ब्रेमर ने ट्रंप की निर्णय लेने की शैली पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि ट्रंप अक्सर विशेषज्ञों की सलाह के बजाय अपने व्यक्तिगत हितों के आधार पर फैसले लेते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों के कारण ट्रंप पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है. यही कारण है कि वे हालात को ज्यादा बिगड़ने से बचाने की कोशिश कर सकते हैं.
अंत में ब्रेमर ने कहा कि इस संघर्ष में कोई भी पक्ष जीतने वाला नहीं है और सभी को आर्थिक और राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.