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India Daily

शांति वार्ता की मेज पर ईरान का 'वीटो', बातचीत से पहले लेबनान में सीजफायर और फंड रिलीज की रखी शर्त!

ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के लिए लेबनान में संघर्षविराम और अपनी जमी हुई वित्तीय संपत्ति को मुक्त करने की शर्त रखी है. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंच रहे हैं.

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शांति वार्ता की मेज पर ईरान का 'वीटो', बातचीत से पहले लेबनान में सीजफायर और फंड रिलीज की रखी शर्त!
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच इस्लामाबाद एक ऐतिहासिक शांति शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस कूटनीतिक मिशन का नेतृत्व करने के लिए पाकिस्तान की यात्रा पर हैं, जहां वे ईरान के साथ छह हफ्तों से जारी संघर्ष को समाप्त करने पर चर्चा करेंगे. हालांकि मेज पर बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान ने अपनी कड़ी शर्तें पेश कर दी हैं, जिससे इस कूटनीतिक प्रयास की राह और भी पेचीदा और चुनौतीपूर्ण हो गई है.

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर घालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि बातचीत तभी शुरू होगी जब दो शर्तें पूरी होंगी. पहली शर्त लेबनान में तत्काल संघर्षविराम और दूसरी शर्त ईरान की ब्लॉक की गई वित्तीय संपत्तियों को जारी करना है. घालिबाफ ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये दोनों कदम पार्टियों के बीच पूर्व समझौतों का हिस्सा थे और इन्हें लागू करना अनिवार्य है. ईरान अब केवल आश्वासनों के बजाय ठोस कार्रवाई के बाद ही वार्ता की मेज पर बैठने को तैयार है.

जेडी वेंस की अमेरिका को चेतावनी 

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस कूटनीतिक पहल को लेकर सावधानी भरा रुख अपनाया है. रवानगी से पहले उन्होंने सकारात्मक परिणाम की उम्मीद जताई, लेकिन तेहरान को सख्त चेतावनी भी दी. वेंस ने कहा कि यदि ईरान अमेरिका के साथ खेल करने या उसे गुमराह करने की कोशिश करेगा, तो उनकी टीम इसके प्रति बिल्कुल भी उदार नहीं रहेगी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता के लिए पहले से ही स्पष्ट दिशा-निर्देश और 'रेड लाइन्स' तय कर दी हैं 

ईरान का संशय और वैकल्पिक योजना 

तेहरान वर्तमान संघर्षविराम ढांचे को लेकर काफी संशय में है. उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रवांची के अनुसार. ईरान ऐसा समझौता नहीं चाहता जो उसके दुश्मनों को दोबारा हथियार जुटाने और हमला करने का अवसर दे. ईरान ने अपना '10-सूत्रीय प्लान' तैयार किया है, जिसमें परमाणु संवर्धन के अधिकारों और क्षेत्रीय प्रभाव को मान्यता देने की मांग शामिल है. यह योजना अमेरिका के 15-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव के सीधे मुकाबले में है, जिससे दोनों पक्षों के बीच गहरा मतभेद उभर रहा है.

क्षेत्रीय विमानन और आर्थिक प्रभाव 

इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. ईरान संकट के कारण दुबई ने विदेशी एयरलाइंस के लिए उड़ानों की संख्या सीमित कर दी है, जिससे भारतीय विमानन कंपनियों को भारी आर्थिक हानि हो रही है. हवाई क्षेत्र बंद होने और ईंधन की कीमतों में 20 प्रतिशत की वृद्धि ने इंडिगो और एयर इंडिया जैसी कंपनियों का बोझ बढ़ा दिया है. यदि इस्लामाबाद में शांति बहाल होती है, तो इससे न केवल हजारों जानें बचेंगी बल्कि विमानन क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिलेगी.

इस्लामाबाद में सुरक्षा का महाकवच 

पाकिस्तान ने इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन के लिए राजधानी को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया है. 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और शहर की सड़कों को सील कर दिया गया है. पाकिस्तानी वायुसेना 'आयरन एस्कॉर्ट' मिशन के तहत ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है. दुनिया भर की निगाहें इस बैठक पर हैं, क्योंकि इसका नतीजा पश्चिम एशिया में युद्धविराम की दिशा और वैश्विक ऊर्जा बाजारों की स्थिरता तय करने में निर्णायक साबित होगा.