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India Daily

अब हूतियों ने दागीं इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें, वैश्विक व्यापार मार्ग पर मंडराया बड़ा खतरा

यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर मिसाइलें दागकर युद्ध में सीधी एंट्री की है. इससे लाल सागर और बाब अल मंदेब जलमार्ग पर खतरा बढ़ गया है, जिसका असर भारत और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ेगा.

KanhaiyaaZee
अब हूतियों ने दागीं इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें, वैश्विक व्यापार मार्ग पर मंडराया बड़ा खतरा
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब एक नए और अत्यंत संवेदनशील चरण में पहुंच गया है. अमेरिका और इजरायल के खिलाफ चल रहे संघर्ष में यमन के हूती विद्रोहियों की एंट्री ने रणनीतिक समीकरण बदल दिए हैं. हूतियों ने शनिवार को इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है. इस घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाला है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों के भविष्य पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.

हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने शनिवार को अल-मसीरा टीवी पर इस बड़े हमले की घोषणा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहला ऐसा अवसर है जब हूतियों ने इजरायल के खिलाफ सीधे तौर पर बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग किया है. सरी ने चेतावनी दी है कि उनके ये हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक उनके निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते. उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिरोध के सभी मोर्चों पर इजरायली आक्रामकता का अंत होना अनिवार्य है.

मिसाइल हमला और इजरायली सुरक्षा कवच 

हूतियों द्वारा जारी बयान के अनुसार, यमन के सशस्त्र बलों ने बैलिस्टिक मिसाइलों की एक श्रृंखला का उपयोग करके अपना पहला सैन्य अभियान चलाया है. इस हमले में दक्षिणी कब्जे वाले फिलिस्तीन में इजरायल के संवेदनशील सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. दूसरी ओर, इजरायली सेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए दावा किया कि उन्होंने यमन की दिशा से आती हुई एक मिसाइल का समय रहते पता लगा लिया था. इजरायली सुरक्षा तंत्र ने उस मिसाइल को सफलतापूर्वक हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया.

लाल सागर मार्ग पर बढ़ता खतरा 

इस हमले के बाद बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर संकट गहरा गया है. यमन की राजधानी सना पर 2024 से काबिज हूती अब तक इस युद्ध से प्रत्यक्ष रूप से बाहर थे. हालांकि, इजरायल-हमास युद्ध के दौरान उन्होंने मालवाहक जहाजों को निशाना बनाकर वाणिज्यिक आवाजाही को पहले ही बाधित किया था. अब उनके सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने से स्वेज नहर का पूरा व्यापारिक मार्ग एक असुरक्षित और खतरनाक क्षेत्र में तब्दील होता नजर आ रहा है.

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती 

लाल सागर का यह जलमार्ग भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह मार्ग स्वेज नहर के जरिए हिंद महासागर को भूमध्य सागर के रास्ते यूरोप के बाजारों से जोड़ता है. यदि हूती विद्रोही इस मार्ग पर हमले जारी रखते हैं, तो भारतीय निर्यात और आयात पर इसका अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. परिवहन की लागत बढ़ने के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भी भारी देरी हो सकती है. भारत के लिए यह स्थिति आर्थिक और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर परीक्षा जैसी है.

वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा संकट 

ईरान के पिछले हमलों के कारण होर्मज जलडमरूमध्य का अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मार्ग पहले से ही बंद पड़ा है. ऐसी स्थिति में सऊदी अरब का यानबू पोर्ट ही तेल निर्यात का एकमात्र जरिया बना हुआ है. यहां से निकलने वाला कच्चा तेल लाल सागर और बाब अल मंदेब के संकरे रास्ते से होकर ही दुनिया तक पहुंचता है. हूतियों के इस युद्ध में प्रवेश के बाद जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रुकने का खतरा है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ सकती हैं.