नई दिल्ली: दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों को 113 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है. हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी पावर प्लांट्स पर हमलों को पांच दिनों के लिए टालने की घोषणा के बाद कीमतों में कुछ कमी देखी गई है. वर्तमान में तेल 103 डॉलर के आसपास है. इस बीच अमेरिका ने तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ईरानी तेल की खरीद पर से अस्थाई तौर पर प्रतिबंध हटा दिए हैं.
कच्चे तेल की कीमतें पिछले कुछ दिनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं. सोमवार को कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर थीं, लेकिन ट्रंप के 'नो-अटैक' ऐलान ने बाजार को थोड़ी राहत दी है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार सरकार ने समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिनों की विशेष छूट दी है. यह छूट उन जहाजों पर लागू होगी जो 19 अप्रैल तक तेल उतार देंगे. इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थाई स्थिरता की उम्मीद है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रतिबंधों में मिली छूट के बाद ईरान ने भारत को फिर से तेल बेचने की पेशकश की है. दिलचस्प बात यह है कि ईरानी व्यापारियों ने भारतीय रिफाइनरियों को आईसीई ब्रेंट की तुलना में प्रीमियम पर तेल खरीदने का प्रस्ताव दिया है. यह प्रीमियम करीब 6-8 डॉलर प्रति बैरल तक हो सकता है. मई 2019 के बाद यह पहला मौका है जब भारत के लिए तेहरान से तेल आयात करने के द्वार खुले हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा सप्लाई बाधित होने के कारण भारत सहित पूरी दुनिया के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के निदेशक फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि यह संकट 1970 के दशक के तेल संकट से भी अधिक गंभीर हो सकता है. भारतीय रिफाइनरियों के पास अब ईरान से तेल और एलपीजी खरीदने के लिए केवल एक महीने का समय बचा है. इस दौरान भारतीय कंपनियों ने रूस से भी भारी मात्रा में तेल खरीदा है.
ईरान से तेल खरीदने में सबसे बड़ी चुनौती भुगतान की है. ईरानी नेशनल ऑयल कंपनी (NIOC) डॉलर में भुगतान चाहती है, लेकिन भारत ने रुपये में व्यापार करने का प्रस्ताव रखा है. कुछ ईरानी व्यापारी रुपये में भुगतान स्वीकार करने को तैयार हैं. लेकिन भारत अभी भी सतर्क है. क्योंकि ईरान अंतरराष्ट्रीय स्विफ्ट पेमेंट सिस्टम से बाहर है. भारतीय रिफाइनरियां डील फाइनल करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि भुगतान सुरक्षित और नियमों के दायरे में हो.
भारत इस समय एक बड़ी कूटनीतिक चाल चल रहा है. एक तरफ अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव है और दूसरी तरफ देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतें. रूस के साथ भारत पहले से ही लोकल करेंसी में व्यापार कर रहा है. अब ईरान के साथ भी ऐसी ही व्यवस्था बनाने की कोशिश जारी है. यदि अगले एक महीने में भारत सफलतापूर्वक तेल आयात कर लेता है, तो इससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिल सकती है.