नई दिल्ली: जहां दुनिया तेज रफ्तार और मशीनों की शोर भरी जिंदगी में उलझी है, वहीं नीदरलैंड का छोटा-सा गांव गिएथूर्न बिल्कुल अलग दुनिया बनाता है. यहां न कारों की भीड़ है, न हॉर्न का शोर. हर आवाज कोमल है- पानी की कलकल, पक्षियों की ध्वनि और हवा का संगीत. यहां लोग घड़ी नहीं देखते, बल्कि सूरज की रोशनी और पानी के बहाव के साथ अपनी दिनचर्या तय करते हैं. यह गांव आज ‘स्लो लिविंग’ का सबसे खूबसूरत उदाहरण माना जाता है.
गिएथूर्न की सबसे खास बात यह है कि यहां मुख्य इलाकों में एक भी सड़क नहीं है. लोग रोजमर्रा की जरूरतें नावों से पूरी करते हैं. घरों को जोड़ने के लिए 170 से ज्यादा लकड़ी के छोटे पुल बने हैं. जिस दुनिया में ट्रैफिक और धुआं आम बात है, वहां यह गांव साबित करता है कि बिना सड़कों के भी जिंदगी आरामदायक हो सकती है.
यहां चलने वाली ‘विस्पर बोट्स’ इलेक्ट्रिक मोटर से चलती हैं और लगभग बिना आवाज के पानी पर फिसलती हैं. यही इस जगह की सबसे बड़ी खूबसूरती है. सुबह खिड़की खोलते ही पानी की हल्की लहरें और पक्षियों की चहचहाहट दिन को खुशनुमा बना देती हैं. यहां किसी को ट्रैफिक का डर नहीं, न पार्किंग की चिंता.
गिएथूर्न के घरों की छतें घास-फूस से बनी पारंपरिक ‘थैच्ड रूफ’ हैं, जो 18वीं सदी की याद दिलाती हैं. हर घर के सामने सुंदर बगीचे हैं, जो सीधे नहरों से जुड़े होते हैं. गर्मियों में यहां की हरियाली और पानी की ठंडक लोगों को बिना AC के भी सुकून देती है. प्रकृति यहां सिर्फ दिखती नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है.
भले ही यहां की आबादी सिर्फ 2800 है, लेकिन दुनिया भर के 10 लाख से अधिक पर्यटक हर साल यहां पहुंच जाते हैं. भीड़ के बावजूद स्थानीय लोगों ने अपनी जीवनशैली से समझौता नहीं किया. वे सड़कों के निर्माण का विरोध करते हैं और अपनी धीमी, शांत जिंदगी को प्राथमिकता देते हैं. यहां समय रफ्तार में नहीं, बल्कि सुकून में मापा जाता है.