नई दिल्ली: कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार तक इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या 7,022 पहुंच गई है, जबकि 3,398 लोगों की मौत हो चुकी है. यह प्रकोप बुंडीबुग्यो प्रजाति के इबोला वायरस से जुड़ा है और कांगो के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बन गया है.
मई 2026 में इटुरी प्रांत में इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा की गई थी. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण जनवरी से ही फैलना शुरू हो गया था. अब वायरस सात प्रांतों तक पहुंच चुका है. सबसे ज्यादा चिंता दक्षिण उबांगी प्रांत में संक्रमण पहुंचने से बढ़ी है. यह इलाका कांगो के उत्तर-पश्चिम में है और कांगो गणराज्य तथा मध्य अफ्रीकी गणराज्य की सीमा से जुड़ा है.
दक्षिण उबांगी में पहला मामला 23 वर्षीय युवक में सामने आया. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, युवक जुलाई में दक्षिण किवु से निकला था और कुछ समय विदेश में रहने के बाद वापस कांगो पहुंचा था. बाद में वह दक्षिण उबांगी गया, जहां उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद जांच में बुंडीबुग्यो वायरस की पुष्टि हुई. मंगलवार को उसकी मौत हो गई. इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने उसके संपर्क में आए लोगों की तलाश शुरू कर दी है.
वायरस के दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचने से संक्रमण पर नियंत्रण मुश्किल हो गया है. इटुरी अभी भी सबसे ज्यादा प्रभावित प्रांत है. नॉर्थ किवु और हाउट-उएले में भी मामले बढ़ रहे हैं. कुल 62 स्वास्थ्य क्षेत्रों में वायरस सक्रिय बताया गया है. मौजूदा आंकड़ों के अनुसार केस फैटलिटी रेट करीब 48 प्रतिशत है. हालांकि 1,671 लोग संक्रमण से ठीक भी हो चुके हैं.
बुंडीबुग्यो इबोला की एक दुर्लभ प्रजाति है. इसके खिलाफ फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है. कुछ उम्मीदवार वैक्सीन ट्रायल के चरण में हैं. जेयर प्रजाति के लिए इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन को बुंडीबुग्यो वायरस के खिलाफ पूरी तरह प्रभावी नहीं माना जाता है.
इबोला संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल सकता है. इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी, दस्त और गंभीर स्थिति में रक्तस्राव शामिल हैं. संक्रमण रोकने के लिए समय पर पहचान, मरीजों को अलग रखना, संपर्कों की निगरानी और सुरक्षित अंतिम संस्कार बेहद जरूरी हैं.
प्रकोप से निपटने में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारियों और पर्याप्त फंड की कमी बड़ी चुनौती बन रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चेतावनी दी है कि संसाधनों की कमी वायरस के भौगोलिक विस्तार को रोकने में बाधा बन सकती है. कई मौतें इलाज केंद्रों के बाहर हो रही हैं. इसके अलावा समुदाय में बीमारी को लेकर डर, स्वास्थ्य टीमों के प्रति अविश्वास, सुरक्षा संबंधी समस्याएं और आबादी का विस्थापन स्थिति को और कठिन बना रहे हैं.