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परमाणु खतरे और पेमेंट सिस्टम पर ब्रिक्स देशों का बड़ा फैसला, जानिए घोषणापत्र में क्या-क्या?

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' जारी किया गया इसमें परमाणु खतरों, सीमा पार भुगतान और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
परमाणु खतरे और पेमेंट सिस्टम पर ब्रिक्स देशों का बड़ा फैसला, जानिए घोषणापत्र में क्या-क्या?
Courtesy: ANI

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' स्वीकार किया इस ऐतिहासिक सम्मेलन का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित कई वैश्विक नेताओं ने भाग लिया घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय विवादों को कूटनीति, बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से हल करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई.

परमाणु खतरों और संघर्षों पर जताई गहरी चिंता

वैश्विक सुरक्षा की स्थिति पर चर्चा करते हुए ब्रिक्स नेताओं ने बढ़ते परमाणु खतरों और संभावित संघर्षों पर गहरी चिंता व्यक्त की समूह ने स्पष्ट किया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद का समाधान युद्ध के बजाय बहुपक्षीय बातचीत से ही संभव है घोषणापत्र में विभिन्न सदस्य देशों के अलग-अलग दृष्टिकोणों का सम्मान करते हुए एक समावेशी और संतुलित वैश्विक व्यवस्था बनाने की वकालत की गई.

सीमा पार भुगतान और स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा

आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स (BPTF) के प्रयासों की सराहना की गई घोषणापत्र में सीमा पार भुगतान को अधिक तेज, सस्ता, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए व्यावहारिक तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया इसके अलावा, सदस्य देशों ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का ध्यान रखते हुए स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में अंतर-संचालनीयता (interoperability) पर आगे बढ़ने पर सहमति जताई.

एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव का कड़ा विरोध

ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करके लगाए जाने वाले एकतरफा दंडात्मक और आर्थिक प्रतिबंधों की कड़े शब्दों में निंदा की समूह का मानना है कि ऐसे एकतरफा उपाय वैश्विक व्यापार, अर्थव्यवस्था और विकासशील देशों की स्थिरता को नुकसान पहुंचाते हैं.

आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और जवाबदेही

घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों की पुरजोर निंदा करते हुए इसे पूरी तरह से आपराधिक और अनुचित बताया गया सम्मेलन के दौरान 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 26 लोग मारे गए थे नेताओं ने आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने तथा दोषियों को कानून के दायरे में लाने की प्रतिबद्धता दोहराई.