नई दिल्ली: अमेरिका में नवंबर 2026 में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने आरोप लगाया कि चीन ने 2020 के चुनाव के दौरान करोड़ों अमेरिकी मतदाताओं का डेटा हासिल किया था और इस संबंध में मौजूद खुफिया जानकारी को अमेरिकी एजेंसियों के कुछ अधिकारियों ने दबा दिया. हालांकि इन दावों का समर्थन अमेरिकी खुफिया समुदाय के आधिकारिक आकलन से नहीं होता.
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि चीन ने लगभग 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डेटा अवैध रूप से हासिल किया. उनके अनुसार इस डेटा में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर और वोटर पंजीकरण से जुड़ी अन्य जानकारियां शामिल थीं. ट्रंप ने इस मामले की एफबीआई से जांच कराने की मांग भी की और कहा कि व्हाइट हाउस ऐसे दस्तावेज सार्वजनिक करेगा जो उनके दावों का समर्थन करते हैं.
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि 2020 में एफबीआई के पास चीन की कथित गतिविधियों से जुड़ी प्रारंभिक खुफिया जानकारी मौजूद थी, लेकिन उसे राष्ट्रपति की दैनिक ब्रीफिंग और सार्वजनिक चर्चा से बाहर रखा गया. उनके अनुसार कुछ अधिकारियों ने जानबूझकर इस जानकारी को दबाया.
हालांकि अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी की मार्च 2021 की आधिकारिक रिपोर्ट अलग निष्कर्ष पर पहुंची थी. रिपोर्ट में उच्च स्तर के विश्वास के साथ कहा गया था कि चीन ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं की. रिपोर्ट के अनुसार चीन को न तो डोनाल्ड ट्रंप और न ही जो बाइडेन की जीत में ऐसा कोई स्पष्ट रणनीतिक लाभ दिखाई दिया, जिसके लिए वह चुनाव में हस्तक्षेप का जोखिम उठाता.
ट्रंप के ताजा बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं. चुनावी सुरक्षा और मतदान प्रणाली को ट्रंप लगातार प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं. दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता चक शूमर सहित कई विपक्षी नेताओं का आरोप है कि ट्रंप पुराने चुनावी विवादों को फिर से उठाकर मौजूदा राजनीतिक चुनौतियों और संभावित चुनावी नुकसान से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं.
रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में चुनाव सुरक्षा से जुड़े कुछ सरकारी कार्यक्रमों में बदलाव भी किए गए. साइबर सुरक्षा और चुनावी बुनियादी ढांचे से जुड़ी एजेंसियों के संसाधनों में कटौती तथा कुछ कार्यक्रमों को बंद किए जाने को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है. इन कदमों को लेकर समर्थकों और आलोचकों के बीच अलग अलग राय बनी हुई है.
फिलहाल ट्रंप के ताजा आरोपों पर आधिकारिक स्तर पर कोई नया साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया है. ऐसे में यह मुद्दा अमेरिका में राजनीतिक बहस और चुनावी माहौल का हिस्सा बना हुआ है.