अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दावे किए. उन्होंने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए दावा किया कि उनके प्रशासन ने 10 महीने में आठ युद्धों को खत्म कराया. जिसमें भारत-पाकिस्तान युद्ध भी शामिल है.
ट्रंप ने दावा किया कि अगर अमेरिका भारत-पाकिस्तान के बीच नहीं आता तो प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शायद बच नहीं पाते. उन्होंने कहा कि संभावित न्यूक्लियर युद्ध में 35 मिलियन लोगों की जान जा सकती थी. उन्होंने खुद को भारत-पाक युद्ध का मध्यस्थ बताया.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने पहलगाम हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरु किया था. जिसके तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया जE रहा था. उन्होंने कहा कि अगर चार दिनों तक चले इस टकराव को रोका नहीं जाता तो कुछ भी हो सकता था. उन्होंने दावा कि इसके लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें 'शांति का आदमी' तथा 'दक्षिण एशिया के लोगों का रक्षक' कहा था. बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में शरीफ ने ट्रंप की समय पर और प्रभावी दखलंदाजी की सराहना की थी. उन्होंने कहा था कि इससे लाखों-करोड़ों जानें बचीं हैं. हालांकि भारत की ओर से हर बार उनके इन दावों को पूरी तरह से खारिज किया गया है.
भारत सरकार का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर डीजीएमओ के स्तर पर सीधे संपर्क से हुआ. जिसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी. इस संबोधन के दौरान भाषण में ट्रंप ने अपनी टैरिफ नीति का भी मजबूती से बचाव किया. उन्होंने इसे ऐतिहासिक आर्थिक सुधार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. ट्रंप ने कहा कि दशकों से अमेरिका को लूटने वाले देश अब सैकड़ों अरब डॉलर दे रहे हैं और सभी खुश हैं. हालांकि एक बार फिर उन्होंने अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की. जिसमें टैरिफ को गलत बताया गया है. उन्होंने फैसला देने वाले जजों के खिलाफ भी हमला बोला है. ट्रंप के इस भाषण को बेहद लंबा और विवादास्पद बताया जा रहा है. उन्होंने हर बार की तरह इस बार भी अपने प्रशासन की तारीफ की है.