नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित और खुला नहीं किया गया, तो अमेरिकी सेना ईरान के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगी. यह बयान ऐसे समय आया है, जब क्षेत्र में युद्ध चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं.
मध्य पूर्व में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. बताया जा रहा है कि पहली बार 4000 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइलें दागी गई हैं, जिससे यूरोप के कई बड़े शहर भी संभावित खतरे में आ गए हैं. इस कदम ने वैश्विक सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है.
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है. हाल के दिनों में ईरान द्वारा इस मार्ग को सीमित करने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल मच गई है. तेल की कीमतों में तेजी आई है और कई देशों ने इसे लेकर चिंता जताई है.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूरोप और जापान समेत कई देशों ने इस संकट पर चिंता व्यक्त की है. ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अन्य देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि वे समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाए रखने के प्रयासों में सहयोग करने के लिए तैयार हैं. हालांकि, वे सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में नाटो सहयोगियों की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका के बिना यह संगठन कमजोर है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सहयोगी देश तेल की कीमतों पर चिंता जताते हैं, लेकिन संकट को हल करने के लिए सक्रिय कदम नहीं उठाते. ट्रंप ने इसे एक सरल सैन्य कार्रवाई बताते हुए कड़ा रुख अपनाने की वकालत की है.
युद्ध अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और दोनों पक्षों के बीच हमले जारी हैं. ईरान में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजरायल में भी कई लोग मारे गए हैं. हालात ऐसे हैं कि आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है.