पश्चिमी एशिया में लगातार गहराते युद्ध के संकट के बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच शनिवार को टेलीफोन पर एक बेहद अहम बातचीत हुई है. इस कूटनीतिक वार्ता के दौरान जहां पीएम मोदी ने शांति का कड़ा संदेश दिया, वहीं ईरान ने युद्ध रोकने के लिए अमेरिका और इजराइल के सामने अपनी स्पष्ट शर्तें रख दी हैं. भारत में स्थित ईरानी दूतावास द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी ने बातचीत की शुरुआत में राष्ट्रपति पेजेशकियान को नवरोज और ईद की शुभकामनाएं दीं. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र में जारी सैन्य आक्रामकता और द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई.
ईरानी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से बातचीत में जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में संघर्ष को खत्म करने की सबसे पहली और बुनियादी शर्त यह है कि अमेरिका और इजरायल अपनी सैन्य आक्रामकता को तुरंत प्रभाव से रोकें. पेजेशकियान ने स्पष्ट किया कि उन्हें भविष्य में दोबारा ऐसे हमले न होने की लिखित गारंटी भी चाहिए. राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि इस युद्ध की शुरुआत ईरान ने नहीं की थी, बल्कि परमाणु वार्ता के बीच उन पर अकारण हमले थोपे गए, जिनमें उनके वरिष्ठ सैन्य कमांडर और कई आम नागरिक मारे गए.
Telephone Conversation between President Pezeshkian and the Prime Minister of India
Dr. Pezeshkian, President of the Islamic Republic of Iran, held a telephone conversation on Saturday, 21 March 2026, with Shri Narendra Modi, Prime Minister of India, during which they discussed… pic.twitter.com/FFjzPnpe81— Iran in India (@Iran_in_India) March 21, 2026Also Read
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कि ये हमले ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए किए गए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई हमेशा से परमाणु हथियारों के सख्त खिलाफ रहे हैं.
इसके उलट, पेजेशकियान ने अमेरिका पर पड़ोसी देशों के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल कर मिनाब के एक स्कूल पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया, जिसमें 168 मासूम बच्चों की जान जाने का दावा किया गया. उन्होंने पूरे क्षेत्र लेबनान, गाजा, इराक में अस्थिरता और टारगेट किलिंग का असली जिम्मेदार इजराइल को ठहराया.
इस बातचीत के दौरान भारत का रुख एकदम स्पष्ट और संतुलित रहा. पीएम मोदी ने क्षेत्र में ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की. उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और फारसी खाड़ी में स्वतंत्र आवागमन सुनिश्चित करने पर खास जोर दिया. प्रधानमंत्री ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि युद्ध का रास्ता किसी के भी हित में नहीं है और सभी पक्षों को कूटनीति के जरिए शांति की ओर लौटना चाहिए.