नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता लगभग तय हो चुका है. ट्रंप ने कहा कि अंतिम बातचीत जारी है और जल्द ही औपचारिक घोषणा की जा सकती है. उन्होंने यह भी दावा किया कि इस समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोला जाएगा.
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि समझौते के ज्यादातर पहलुओं पर सहमति बन चुकी है. उनके अनुसार केवल अंतिम शर्तों और तकनीकी बिंदुओं पर चर्चा चल रही है. ट्रंप ने कहा कि यह समझौता खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है.
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने कई देशों के नेताओं से बातचीत की है. इनमें सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान, कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी, तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू शामिल हैं. ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू के साथ उनकी बातचीत काफी अच्छी रही.
हालांकि ईरानी मीडिया ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया है. ईरान की मीडिया रिपोर्ट ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह अमेरिका की शर्तों पर नहीं खुलेगा और इसका नियंत्रण ईरान के पास ही रहेगा. रिपोर्ट के मुताबिक अगर समझौता होता भी है तो जलमार्ग के संचालन, जहाजों के गुजरने के समय और परमिट जारी करने का अधिकार केवल ईरान के पास रहेगा.
रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है. पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर की मौजूदगी में तेहरान में उच्चस्तरीय वार्ता हुई थी. सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित समझौता तीन चरणों में लागू हो सकता है. इसमें युद्ध खत्म करना, होर्मुज संकट का समाधान और 30 दिन की व्यापक बातचीत शामिल है.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी कहा कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य बिना किसी टोल के खुला रहना चाहिए और ईरान को अपना समृद्ध यूरेनियम सौंपना होगा.
वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उपयोग के लिए है. ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंध हटाने और तेल निर्यात पर लगी रोक खत्म करने की मांग दोहराई है. इस संभावित समझौते को लेकर दुनिया की नजरें अब अमेरिका और ईरान पर टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर वैश्विक तेल बाजार और पश्चिम एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है.