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India Daily

ईरान ने जारी किया ट्रंप के सिर का सिटी स्कैन, अंदर बैठे नजर आए नेतन्याहू

ईरानी दूतावास द्वारा ट्रंप और नेतन्याहू पर तंज कसती तस्वीर शेयर करने के बाद अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ गया है. युद्ध का असर मिडिल ईस्ट से लेकर वैश्विक तेल आपूर्ति तक पड़ा है, जबकि होर्मुज स्ट्रेट संकट से कई देश चिंतित हैं.

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ईरान ने जारी किया ट्रंप के सिर का सिटी स्कैन, अंदर बैठे नजर आए नेतन्याहू
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. ईरान पर इजरायल और अमेरिका के द्वारा किए गए ताबड़तोड़ हवाई हमलों के बाद से ही तनाव चरम पर है. इसी बीच अब ताशकंद में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर शेयर की है, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ने के आसार हैं.

दरअसल, ईरानी दूतावास ने जो तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है, उसमें ट्रंप के मस्तिष्क का प्रतीकात्मक एक्स-रे नजर आ रहा है, जिसके अंदर में इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू बैठे हुए नजर आ रहे हैं. इस तस्वीर के जरिये ईरान ने न सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर, बल्कि नेतन्याहू पर पर जोरदार निशाना साधा है. 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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27 फ़रवरी के बाद से बिगड़े हालात

दरअसल, 27 फ़रवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए ईरान में कई जगहों पर बम बरसाए थे. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की कार्रवाई की आग सिर्फ ईरान तक ही सिमित नहीं रही, बल्कि ये समूचे मिडिल ईस्ट में फ़ैल गई, जिसकी लपटें अब खाड़ी देशों को झुलसा रही है.अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें उन देशों की आधारभूत संरचनाएं भी ध्वस्त हो गयी.

दुनिया के कई देशों पर पड़ा युद्ध का असर

अमेरिका-ईरान युद्ध का असर न सिर्फ मिडिल ईस्ट के देशों पर, बल्कि दुनिया के कई देश इस युद्ध की तपिश में जल रहे हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित तेल आपूर्ति व्यवस्था हुई है, जिसकी वजह से कई देश तेल संकट का सामना कर रहे हैं. चूंकि युद्ध के बाद से होर्मुज स्ट्रेट से आने वाले जहाजों के आवागमन को ईरान ने रोक रखा है, जिसकी वजह से कई देशों में तेल स्टॉक ख़त्म होने की कगार पर है.

कई बार दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर सहमत होनेकी बात भी सामने आई है, लेकिन अबतक ऐसी किसी समझौते पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई है, जिससे दुनिया के कई देश अब भी तेल संकट को लेकर आशंकित हैं. युद्ध का प्रभाव मिडिल ईस्ट के देशों पर भी व्यापक रूप से पड़ा है और यहां की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल हो गई है.