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India Daily

ट्रंप ने किया ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ बनाने का ऐलान, बोले- औद्योगिक क्रांति और इंटरनेट से भी बड़ी है AI तकनीक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एडवांस्ड AI के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ बनाने का ऐलान किया है. टीम AI के जोखिम, सुरक्षा और अमेरिकी तकनीकी नेतृत्व पर रिपोर्ट देगी.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
ट्रंप ने किया ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ बनाने का ऐलान, बोले- औद्योगिक क्रांति और इंटरनेट से भी बड़ी है AI तकनीक
Courtesy: @MarioNawfal

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने अमेरिका में एडवांस्ड AI और भविष्य की सुपरइंटेलिजेंस तकनीक से जुड़े सरकारी प्रयासों को एक साथ लाने के लिए ‘Super Intelligence Force’ बनाने की घोषणा की है.

इस नई टीम की जिम्मेदारी अमेरिका के डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस जे क्लेटन को दी गई है. इसे प्रशासन में AI से जुड़े काम को समन्वित करने वाली महत्वपूर्ण व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है.

120 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

नई टीम को AI से जुड़े जोखिम और संभावित फायदे की समीक्षा करनी होगी. इसके अलावा AI सिस्टम में होने वाली हैकिंग, सुरक्षा उल्लंघन और अन्य घटनाओं की रिपोर्टिंग को बेहतर बनाने के तरीके भी सुझाए जाएंगे.

टीम करीब 120 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति ट्रंप और व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स को देगी. इसके बाद सरकार मौजूदा कानूनी अधिकारों के तहत AI सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आगे के कदमों पर विचार कर सकती है.

अमेरिका की तकनीकी बढ़त बनाए रखना लक्ष्य

ट्रंप प्रशासन का एक बड़ा लक्ष्य AI के क्षेत्र में अमेरिका की वैश्विक बढ़त बनाए रखना है. सरकार का मानना है कि आने वाले समय में एडवांस्ड AI आर्थिक विकास, सुरक्षा और तकनीकी प्रतिस्पर्धा में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अमेरिका इस क्षेत्र में पीछे नहीं रहना चाहता. उनके मुताबिक AI में सबसे आगे रहने की होड़ में देरी करना अमेरिका के लिए जोखिम पैदा कर सकता है.

ट्रंप ने AI को बताया औद्योगिक क्रांति से बड़ा

ट्रंप ने सुपरइंटेलिजेंस को लेकर कहा कि कई लोग इसे औद्योगिक क्रांति और इंटरनेट से भी बड़ी तकनीकी घटना मानते हैं.

उन्होंने AI यानी Artificial Intelligence शब्द को लेकर भी अपनी राय रखी. ट्रंप का कहना है कि ‘Artificial’ शब्द से तकनीक ऐसी लगती है जैसे वह नकली हो, जबकि उनके मुताबिक यह तकनीक बेहद वास्तविक और प्रभावशाली है. इसी सोच के तहत अमेरिकी प्रशासन के कुछ हिस्सों में ‘Super Intelligence’ या ‘SI’ शब्द का इस्तेमाल बढ़ाने की बात सामने आई है.

कई बड़े अधिकारी होंगे टीम में

इस फोर्स में अमेरिका के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स इसके सदस्यों में शामिल हैं.

इसके अलावा फेडरल ट्रेड कमीशन के चेयरमैन एंड्रयू फर्ग्यूसन, रक्षा अनुसंधान एवं इंजीनियरिंग से जुड़े अधिकारी एमिल माइकल और ऑफिस ऑफ पर्सनेल मैनेजमेंट के निदेशक स्कॉट कुपोर को उपाध्यक्ष की भूमिका दी गई है. वेंचर कैपिटलिस्ट डेविड सैक्स और पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस बाहरी सलाहकार के तौर पर काम करेंगे.

AI की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ी

एडवांस्ड AI को लेकर दुनिया भर में उत्साह के साथ सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ रही हैं. कुछ शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि बेहद शक्तिशाली AI सिस्टम अगर सही तरीके से नियंत्रित नहीं किए गए तो गंभीर नुकसान हो सकता है.

अमेरिका में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के कुछ सांसद भी AI सुरक्षा और सरकारी निगरानी बढ़ाने की मांग कर चुके हैं.

हालांकि ट्रंप अत्यधिक सरकारी नियंत्रण के पक्ष में नहीं रहे हैं. उनका तर्क है कि जरूरत से ज्यादा नियम अमेरिका की तकनीकी कंपनियों की गति को धीमा कर सकते हैं और चीन के साथ प्रतिस्पर्धा में अमेरिका को नुकसान हो सकता है.

चीन से आगे रहने पर जोर

ट्रंप ने AI के मामले में चीन के साथ प्रतिस्पर्धा को भी अहम बताया है. उनका कहना है कि अमेरिका फिलहाल चीन और दूसरे देशों से आगे है और वह इस बढ़त को बनाए रखना चाहते हैं.

उन्होंने AI के नियमों को लेकर चीन के साथ सहयोग करने में भी सावधानी बरतने की बात कही. ट्रंप का मानना है कि अत्यधिक सहयोग अमेरिकी कंपनियों के लिए वैश्विक तकनीकी दौड़ में मुश्किल पैदा कर सकता है.

AI की नई दौड़ की शुरुआत?

‘Super Intelligence Force’ का गठन अमेरिका की AI रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. आने वाले महीनों में इस टीम की रिपोर्ट से पता चलेगा कि अमेरिका एडवांस्ड AI के जोखिमों और संभावनाओं को लेकर किस तरह की नीति अपनाता है.

एक तरफ सरकार तकनीकी विकास और वैश्विक नेतृत्व को तेज करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ AI की सुरक्षा और संभावित खतरों पर भी नजर रखना चाहती है. ऐसे में यह नई फोर्स अमेरिका की भविष्य की AI नीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है.