Dubai Cloud Seeding: 16 अप्रैल... ये वो तारीख थी, जब दुबई से हैरान करने वाली तस्वीरें आईं. रेगिस्तान के बीचोंबीच बसे दुबई में अचानक बारिश होने लगी और कई इलाके पानी से भर गए. कई इलाकों में तो बारिश के पानी में कारें नाव की तरह बहने लगीं. कहा जा रहा है कि दो सालों की बारिश एक ही दिन में हो गई, जिसकी वजह से ये नौबत आई. लेकिन सवाल ये कि आखिर कैसे रेगिस्तानी शहर में इतनी अधिक बारिश हो गई? जवाब तलाशने की कोशिश की गई तो पता चला कि क्लाउड सीडिंग के कारण दुबई में जलजला आ गया. ये वही क्लाउड सीडिंग है, जिसका यूज अमेरिका 50 के दशक यानी 70 साल पहले से कर रहा है और UAE में भी इसका यूज 22 साल पहले से किया जा रहा है.
दरअसर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समय-समय पर पानी की कमी को पूरा करने के लिए क्लाउड सीडिंग का यूज करीब 2002 से करना शुरू किया. UAE के मौसम विभाग की माने तो 16 अप्रैल को बारिश के कारण दुबई में बाढ़ आ गई, जिससे उड़ानें रद्द हो गईं. ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ और स्कूल बंद हो गए. सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो में सड़कों से कारें बहती हुई दिखाई दे रही हैं, जबकि एक अन्य वीडियो में दुबई के सबसे लोकप्रिय मॉल में पानी भर जाने से एक दुकान की छत ढहती हुई दिखाई दे रही है. दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार को फ्लाइट्स प्रभावित रहीं और पैसेंजर चेक इन को कैंसिल कर दिया गया.
Look at the floods in Dubai pic.twitter.com/sF7Ez2nHi4
— BBlues100🏴🇬🇧 (@BBlues100) April 17, 2024Also Read
क्लाउड सीडिंग का उद्देश्य बारिश को बढ़ाना है. पानी की कमी वाले इलाकों में आर्टिफिशियल तरीके से बारिश कराना है. डेजर्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से किए गए एक रिसर्च के मुताबिक, क्लाउड सीडिंग के प्रोजेक्ट्स ने अमेरिका में नेवादा पहाड़ों पर टारगेट किए गए इलाकों में बारिश और बर्फबारी में हर साल करीब 10% की बढ़ोतरी की है. व्योमिंग की बर्फीली रेंज और सिएरा माद्रे रेंज के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया के बर्फीले पहाड़ों में भी इसी तरह से बारिश को बढ़ाया गया है.
क्लाउड सीडिंग का इतिहास 1940 के दशक से जुड़ा हुआ है. 1950 और 1960 के दशक के दौरान ये अमेरिका में काफी यूज किया जाने लगा, जिससे न सिर्फ किसानों बल्कि बिजली कंपनियों और स्की रिसॉर्ट्स को काफी फायदा हुआ. लेकिन अगले कुछ साल में इसे बंद कर दिया गया. 1977 में अमेरिका, रूस, भारत और कुछ यूरोपीय देशों ने पर्यावरण संशोधन सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए. फिलहाल, अब इसकी जरूरत महसूस होने लगी है. कई ऐसे देश हैं, जो जलवायु परिवर्तन के बाद तेजी से पानी की कमी का सामना कर रहे हैं.
Reason behind #dubaiflood was artificial cloud seeding ?pic.twitter.com/w6AbQs34wJ
— Bhavna Bajaj (@BajajBhavnaa) April 17, 2024
क्लाउड सीडिंग का यूज फिलहाल पश्चिमी अमेरिकी राज्यों, फ्रांस और स्पेन समेत यूरोपीय देशों में किया जा रहा है. चीन इसका उपयोग सिंचाई के लिए और बीजिंग में इसका यूज किया जाता है. 2008 ओलंपिक के दौरान भी इसका यूज किया गया था.
टेक्नोलॉजी के बढ़ते यूज के कारण विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) में एक टीम का गठन हुआ, जिसने 2023 की रिपोर्ट में टेक्नोलॉजी के यूज के बाद उसके परिणाणों के बारे में ज्ञान की कमी के बारे में चेतावनी दी. टीम ने अन्य चिंताएं भी जताईं, जिसमें मौजूदा मौसम के पैटर्न में बदलाव भी शामिल है. कहा गया कि बारिश के लिए टेक्नोलॉजी के यूज के कारण खेती वाले इलाकों में ओला के गिरने जैसी स्थितियां पैदा हो सकतीं हैं, जो फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने ये भी कहा कि क्लाउड सीडिंग में यूज किए जाने वाले सिल्वर आयोडाइड जैसे कैमिकल्स होते हैं, जो जहरीले होते हैं.
दशकों पहले, इंसान ने जिस टेक्नोलॉजी का यूज बारिश और बर्फबारी के लिए करना शुरू किया था, उसकी जरूरत अब कई देशों को होने लगी है. हालांकि, ये कितना सही और कितना गलत है, इस पर बहस भी होती है, जिसे जियोइंजीनियरिंग कहा जाता है. इसके पक्ष में रहने वालों का तर्क है कि जलवायु संकट से निपटना इतना जरूरी है कि कोई भी विकल्प नहीं छोड़ा जाना चाहिए, जबकि विरोध करने वालों ने इसके कारण होने वाले दुष्प्रभावों की चेतावनी दी है.
Major floods on the streets due to heavy rains in Dubai, UAE 🇦🇪 #X_promo #BREAKING_NEWS pic.twitter.com/r3rLzbmhaG
— Pearl-2024 (@Pearl_2024) April 17, 2024
क्लाउड सीडिंग टेक्नोलॉजी का यूज कर मौसम में बदलाव करने के बाद बारिश कराने की प्रक्रिया है. इसके तहत छोटे विमानों को बादलों के बीच से गुजारा जाता है, जो इस बादलों के बीच सिल्वर आयोडाइड, ड्राई आइस और क्लोराइड छोड़ते हैं, जिससे बादलों पर बारिश की बूंदें जम जाती हैं, जो बारिश बनकर बरसती हैं. आमतौर पर बरसने वालीं बूंदों से ये काफी तेज होती हैं, जिससे कम समय में अधिक बारिश हो जाती है.