Hangor Class Submarine: चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ती दोस्ती अब हिंद महासागर में नई चुनौतियां खड़ी कर रही है. हाल ही में चीन ने पाकिस्तान को आठ उन्नत हंगोर-श्रेणी की पनडुब्बियों में से तीसरी पनडुब्बी सौंप दी है. यह कदम न केवल पाकिस्तान की नौसैनिक ताकत को बढ़ा रहा है बल्कि भारत जैसे पड़ोसी देशों के लिए भी चिंता का कारण बन रहा है.
हंगोर-श्रेणी की पनडुब्बियां आधुनिक तकनीक और शक्तिशाली हथियारों से लैस हैं. इनमें नई टेक्नोलॉजी वाले सेंसर, बेहतर स्टील्थ और लंबे समय तक पानी के नीचे रहने की ताकत के साथ बनाया गया है. इसके अलावा इस सबमरीन में जबरदस्त मारक क्षमता शामिल है. गुरुवार को चीन के वुहान शहर में तीसरी पनडुब्बी का जलावतरण समारोह आयोजित हुआ, जिसमें पाकिस्तानी नौसेना के अधिकारियों ने हिस्सा लिया.
चीन पिछले कुछ वर्षों से पाकिस्तान की नौसैनिक ताकत को बढ़ाने में जुटा हुआ है. इन आठ पनडुब्बियों के अलावा, चीन ने पाकिस्तान को चार आधुनिक युद्धपोत भी दिए हैं. ग्वादर बंदरगाह के विकास के साथ-साथ चीन अरब सागर और हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम भारत और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के लिए चुनौती बन सकते हैं.
चीन न केवल पनडुब्बियां बल्कि कई अन्य सैन्य उपकरण भी पाकिस्तान को दे रहा है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंसटीट्यूट (SIPRI) की एक रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान के 81% से ज्यादा सैन्य हार्डवेयर की आपूर्ति चीन से होती है.
इसमें जासूसी जहाज (रिजवान), 600 से अधिक वीटी-4 युद्धक टैंक, और 36 जे-10 सीई लड़ाकू विमान शामिल हैं. साल 2022 में चीन ने पाकिस्तान को जे-10सीई लड़ाकू विमानों की पहली खेप सौंपी थी, जो भारत के साथ तनावपूर्ण हालात में इस्तेमाल हो चुके हैं.
हंगोर-श्रेणी की पनडुब्बियां और अन्य सैन्य उपकरण पाकिस्तान की नौसैनिक और हवाई ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं. ये पनडुब्बियां अपनी उन्नत तकनीक के कारण समुद्र में किसी भी खतरे का सामना करने में सक्षम हैं. हालांकि, पाकिस्तान का कहना है कि ये हथियार क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए हैं लेकिन भारत जैसे देश इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देख रहे हैं.