नई दिल्ली: अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक कड़ा बयान जारी किया है. उन्होंने घोषणा की कि अब अमेरिका को सबक सिखाना ही ईरान का मुख्य उद्देश्य है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अब अमेरिका के साथ किसी भी तरह के समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है.
अराघची का यह बयान तब आया है जब कथित तौर पर एक अमेरिकी-इजरायली हमले में ईरान के एक महत्वपूर्ण पुल को निशाना बनाया गया था. ईरान ने चेतावनी दी है कि अपने बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमलों का बदला लेने के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है.
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा, 'पुलों को तो फिर से बनाया जा सकता है, लेकिन अमेरिका को सबक सिखाने का मौका दोबारा नहीं मिलेगा.' उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान उस युद्ध को निर्णायक और स्थायी रूप से समाप्त करने की शर्तें तय करना चाहता है, जिसे अमेरिका और इजरायल ने इस देश पर थोपा है. उन्होंने जोर देकर कहा, 'हमारी चिंता यह सुनिश्चित करना है कि इस अवैध युद्ध का निर्णायक और स्थायी अंत हो, जिसे हम पर थोपा गया है.'
रिपोर्ट में ईरान ने आधिकारिक तौर पर मध्यस्थों को सूचित कर दिया है कि वह आने वाले दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है और वह अमेरिका की मांगों को अस्वीकार्य मानता है. शुक्रवार की सुबह ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ने एक जानकार सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान ने 48 घंटे के संघर्ष-विराम के अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. यह प्रस्ताव पिछले दिन एक 'मित्र' राष्ट्र के माध्यम से भेजा गया था.
अराघची ने यह भी कहा कि बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर लगातार हमलों के परिणामस्वरूप निकलने वाला रेडियोधर्मी विकिरण न केवल तेहरान में बल्कि पड़ोसी देशों की राजधानियों में भी जीवन को पूरी तरह से नष्ट कर देगा. उन्होंने पश्चिमी सरकारों पर आरोप लगाया कि वे अपनी परमाणु सुविधाओं पर बार-बार होने वाले हमलों के संबंध में चुप्पी साधे हुए हैं.
शनिवार को ईरान के बुशेहर परमाणु संयंत्र पर चौथी बार हमला किया गया. इस घटना में एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई और एक इमारत को नुकसान पहुंचा. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार विकिरण के स्तर में कोई वृद्धि नहीं हुई है.