नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक बेहद गंभीर और चेतावनी भरा संदेश जारी किया है. अरागची ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले जारी रहते हैं, तो इससे निकलने वाला रेडियोधर्मी विकिरण तेहरान के बजाय खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों की राजधानियों में जीवन समाप्त कर सकता है. उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर पड़ोसी अरब देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
अपने कड़े संदेश में ईरानी विदेश मंत्री ने पश्चिमी सरकारों की भूमिका पर भी तीखे सवाल उठाए. उन्होंने इसे पश्चिम का 'दोहरा मापदंड' करार देते हुए पूछा, 'क्या यूक्रेन के जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास हो रही सैन्य गतिविधियों पर पश्चिमी देशों का वह भारी आक्रोश याद है?' अरागची ने आलोचना करते हुए कहा कि उनके देश के बुशहर संयंत्र पर लगातार हो रहे हमलों के बावजूद पश्चिमी देश मौन साधे हुए हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के पेट्रोकेमिकल संयंत्रों और परमाणु बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना हमलावरों के वास्तविक और खतरनाक उद्देश्यों को दर्शाता है.
Remember the Western outrage about hostilities near Zaporizhzhia Nuclear Power Plant in Ukraine?
Israel-U.S. have bombed our Bushehr plant four times now. Radioactive fallout will end life in GCC capitals, not Tehran.
Attacks on our petrochemicals also convey real objectives. pic.twitter.com/onGCgkJFjt— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 4, 2026Also Read
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ताजा घटनाक्रम के अनुसार, शनिवार को अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमले का एक गोला बुशहर परमाणु संयंत्र के करीब गिरा. सरकारी मीडिया और 'इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी' के मुताबिक, इस घटना में एक सुरक्षा गार्ड की जान चली गई. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पुष्टि की है कि संयंत्र को कोई प्रत्यक्ष नुकसान नहीं पहुँचा है और क्षेत्र में विकिरण के स्तर में भी कोई वृद्धि दर्ज नहीं की गई है. रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से बुशहर क्षेत्र पर यह चौथा बड़ा हमला है.
बुशहर परमाणु संयंत्र ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 750 किलोमीटर दक्षिण में खाड़ी तट पर स्थित है. यह संयंत्र लगभग 1000 मेगावाट बिजली का उत्पादन करता है और इसके संचालन के लिए रूस द्वारा कम-संवर्धित यूरेनियम की आपूर्ति की जाती है. तकनीकी रूप से भी यह संयंत्र रूसी विशेषज्ञों की देखरेख में संचालित होता है.
मौजूदा संघर्ष के दौरान ईरान का परमाणु ढांचा बार-बार सैन्य हमलों की जद में आया है. बुशहर के अलावा, नतांज परमाणु केंद्र, फोर्डो ईंधन संवर्धन संयंत्र और इस्फहान परमाणु प्रौद्योगिकी केंद्र जैसे प्रमुख ठिकानों को भी बार-बार निशाना बनाया गया है. ये केंद्र ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं और इनका क्षतिग्रस्त होना पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़े पर्यावरणीय अपराध और आपदा का कारण बन सकता है.