रूस और ईरान के बीच 20 वर्षीय सामरिक साझेदारी समझौता इस शुक्रवार को औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित होने जा रहा है. यह समझौता दोनों देशों के बीच सुरक्षा, रक्षा, और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. इस साझेदारी का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को एक नए स्तर पर पहुंचाना है, जो वैश्विक राजनीति और सुरक्षा की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है.
इस समझौते के तहत रूस और ईरान अपने रक्षा तंत्र को मजबूत करेंगे और एक दूसरे की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सहयोग करेंगे. इसमें सैन्य प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान, और संयुक्त सैन्य अभ्यास जैसी गतिविधियों का समावेश होगा. इसके अलावा, दोनों देशों के बीच ऊर्जा, परिवहन, और अन्य बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा.
17 जनवरी को मास्को में वार्ता के बाद समझौते पर हस्ताक्षर
क्रेमलिन ने सोमवार को कहा कि ईरानी राष्ट्रपति और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन 17 जनवरी को मास्को में वार्ता के बाद समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे. रूस और ईरान का यह सामरिक गठजोड़ वैश्विक राजनीति में कई मायनों में अहम हो सकता है. पश्चिमी देशों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, के साथ दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. अमेरिका ने ईरान पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जबकि रूस पर भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में रूस और ईरान का यह समझौता एक दूसरे को रणनीतिक रूप से सशक्त करने का एक प्रयास है.
इजरायल के लिए टेंशन
इस समझौते से दोनों देशों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण सुधार होने की उम्मीद है. रूस की सैन्य ताकत और ईरान की भू-राजनीतिक स्थिति, विशेष रूप से मध्य-पूर्व क्षेत्र में, एक दूसरे के लिए फायदेमंद हो सकती है. साथ ही, यह साझेदारी दोनों देशों को क्षेत्रीय संघर्षों और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने की ताकत दे सकती है.