अमेरिका और चीन इस बात पर सहमत हो गए हैं कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को बीजिंग में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद रॉयटर्स ने व्हाइट हाउस के अधिकारी के हवाले से यह बात कही.
व्हाइट हाउस द्वारा जारी बयानों के अनुसार, व्यापार, फेंटानिल की तस्करी और ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ ईरान का मुद्दा दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत का प्रमुख मुद्दा था.
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेहरान, इजरायल और वाशिंगटन के बीच हुए नाजुक संघर्षविराम के भविष्य को लेकर चिंताओं के बीच कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.
दोनों नेताओं ने होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के महत्व पर भी सहमति व्यक्त की. बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट तेल और गैस के निर्यात का एक प्रमुख मार्ग है. दुनिया को कुल तेल और गैस के पांचवें हिस्से की सप्लाई इसी मार्ग से होती है. व्हाइट हाउस ने कहा कि दोनों देश ऊर्जा के प्रवाह के समर्थन में होर्मुज को खुला रखने की बात पर सहमत हुए.
सीएनएन के अनुसार, ट्रंप से उम्मीद की जा रही थी कि वे शी जिनपिंग पर दबाव डालेंके कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए चीन ईरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे. बता दें कि चीन ईरान से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाला देश है और उसके तेहरान के साथ करीबी आर्थिक संबंध हैं.
सीएनएन ने व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि शी जिनपिंग ने साफ तौर पर कहा कि चीन होर्मुज स्ट्रेट का सैन्यीकरण करने और इसके इस्तेमाल पर टोल वसूलने के पूरी तरह खिलाफ है. अधिकारियों ने बताया कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर निर्भरता को खत्म करने के लिए शी जिनपिंग ने अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने की प्रतिबद्धता जताई. हालांकि व्हाइट हाउस ने इस बात के संकेत नहीं दिए कि शी जिनपिंग मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को कम करने के लिए और सक्रिय भूमिका निभाएंगे या नहीं.