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होमुर्ज के बाद क्या बंद हो जाएगा बाब अल-मंडेब स्ट्रेट? हूतियों के विरोध से तबाह होगा यूरोप! 'गेट ऑफ टियर्स' बन सकती है नई मुसीबत

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के बीच बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर भी खतरा मंडराने लगा है. अगर यह रास्ता बाधित हुआ तो एशिया-यूरोप व्यापार, तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
होमुर्ज के बाद क्या बंद हो जाएगा बाब अल-मंडेब स्ट्रेट? हूतियों के विरोध से तबाह होगा यूरोप! 'गेट ऑफ टियर्स' बन सकती है नई मुसीबत
Courtesy: grok

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच अब एक और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग चर्चा में है- बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य. यमन के हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और यूरोप तक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है.

विशेषज्ञों का मानाना है कि यदि बाब अल-मंडेब मार्ग भी प्रभावित हुआ तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बड़ा झटका लग सकता है. लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला यह संकरा रास्ता एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार की अहम कड़ी माना जाता है. यही वजह है कि दुनिया की नजरें इस जलमार्ग पर टिकी हुई हैं.

बाब अल-मंडेब क्यों है इतना अहम

बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में गिना जाता है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है. इस मार्ग से गुजरकर जहाज स्वेज नहर के रास्ते यूरोप तक पहुंचते हैं. भौगोलिक रूप से यह यमन और अफ्रीकी देशों जिबूती तथा इरिट्रिया के बीच स्थित है. इसकी चौड़ाई अपेक्षाकृत कम है, लेकिन वैश्विक समुद्री यातायात के लिए इसका महत्व बेहद बड़ा है. यही कारण है कि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार तुरंत प्रभावित हो जाते हैं.

होर्मुज संकट के बाद बढ़ी चिंता

खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव बना हुआ है. यह मार्ग दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है. ऐसे में जब इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई तो ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ गई. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाब अल-मंडेब भी अस्थिर होता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति और गंभीर हो सकती है. दो अहम समुद्री मार्गों पर संकट का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक स्तर पर दिखाई दे सकता है.

तेल बाजार पर दिख रहा असर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों में भी दिखाई देने लगा है. वैश्विक बाजार में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है. कई बार तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं, जिससे ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समुद्री मार्गों पर संकट गहराता है तो तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर

बाब अल-मंडेब मार्ग से एशिया और यूरोप के बीच बड़ी मात्रा में व्यापारिक जहाज गुजरते हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, खाद्यान्न और ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर जाता है. यदि किसी वजह से यह मार्ग बाधित होता है तो जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ेगा. इससे यात्रा का समय और लागत दोनों बढ़ जाएंगे. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति वैश्विक व्यापार के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है और कई देशों में महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है.

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