नई दिल्ली: तेहरान के व्यस्त गलियारों में अभी भी सन्नाटा पसरा है. अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को मध्य तेहरान स्थित आवास पर हुई हत्या ने पूरे मध्य पूर्व को हिला दिया था. वह अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष का पहला दिन था. अब उनका अंतिम संस्कार टलने की खबर ने देशवासियों के दिलों में नई उथल-पुथल मचा दी है. लोग पूछ रहे हैं कि आखिर यह देरी क्यों? क्या पीछे कोई बड़ा राज छिपा है?
तेहरान प्रशासन ने गुरुवार को आधिकारिक घोषणा की कि अयातुल्ला खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार जून के अंत या जुलाई की शुरुआत तक स्थगित किया जा रहा है. मेयर अलीरेजा जकानी ने स्पष्ट किया कि इमाम हुसैन के वार्षिक शोक को पहले पूरा करने की जरूरत है. मुहर्रम का पहला महीना पवित्र माना जाता है और ईरान इसकी गरिमा बनाए रखना चाहता है. तीन दिवसीय कार्यक्रम में लाखों श्रद्धालु शामिल होने वाले थे.
अभी तक यह साफ नहीं है कि खामेनेई को कहां दफनाया जाएगा. पहले फार्स न्यूज एजेंसी ने उनके गृहनगर मशहद के इमाम रजा दरगाह का जिक्र किया था, लेकिन अस्तान कुद्स रजावी फाउंडेशन ने अप्रैल में इसकी पुष्टि से इनकार कर दिया. अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निर्णय अभी लंबित है. इस अनिश्चितता ने पूरे देश में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है.
अधिकारियों का अनुमान है कि खामेनेई के अंतिम संस्कार में करीब 20 मिलियन यानी दो करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं. इतनी बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होने से सुरक्षा और व्यवस्था की चुनौतियां बढ़ जाएंगी. यही वजह है कि तेहरान सावधानी बरत रहा है और सही समय का इंतजार कर रहा है.
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो चुका है, जिस पर इस सप्ताहांत यूरोप में हस्ताक्षर होंगे. उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार त्याग देगा और होर्मुज जलडमरूमध्य खुल जाएगा. उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इस समझौते के गवाह बनेंगे.
ईरान ने ट्रंप के दावे का खंडन करते हुए कहा है कि कोई अंतिम समझौता अभी नहीं हुआ है. देश अभी भी युद्ध के बाद की स्थिति से उबर रहा है. खामेनेई के अंतिम संस्कार की देरी इस पूरे माहौल को और जटिल बना रही है. लोग उम्मीद कर रहे हैं कि शांति की किरण जल्द दिखेगी.
खामेनेई की हत्या के बाद ईरान एक नए दौर से गुजर रहा है. उनका अंतिम संस्कार न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि देश की एकता और भावी दिशा का प्रतीक भी बन गया है. देरी के बावजूद लाखों लोग इंतजार में हैं. इतिहास के इस मोड़ पर हर कोई उम्मीद और चिंता के बीच झूल रहा है.