नई दिल्ली: अगले हफ्ते एक एस्टेरॉयड पृथ्वी के बहुत पास से गुजरने वाला है. इस एस्टेरॉयड का नाम 2026 JH2 है. इसकी खोज हाल ही में की गई है. वैज्ञानिकों की मानें तो सोमवार को हमारी धरती से लगभग 56,000 मील की दूरी से यह गुजरेगा. यह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से काफी कम है. हालांकि, आम लोगों को इससे परेशान होने की जरुरत नहीं. वर्तमान गणनाओं से ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि यह वस्तु पृथ्वी से टकराएगी.
इस एस्टेरॉयड की पहचान कुछ दिन पहले अमेरिका के कैनसास और एरिजोना के स्पेस ऑब्जरवेटरी के वैज्ञानिकों ने की है. कहा जा रहा है कि इससे डरने की जरुरत नहीं है. अगले 100 साल तक इससे कोई खतरा नहीं है.
नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के अनुमानों के अनुसार, 2026 JH2 नामक इस एस्टेरॉयड का व्यास संभवतः 50 से 100 फीट के बीच है. यह अनुमान वस्तु की चमक और वैज्ञानिकों द्वारा इसकी सतह से परावर्तित होने वाली प्रकाश की मात्रा के आधार पर लगाया गया है.
खगोलविद अभी भी क्षुद्रग्रह की कक्षा और भौतिक विशेषताओं को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश कर रहे हैं. अब तक, इस पिंड को केवल 24 बार ही ट्रैक किया गया है. हालांकि इसकी स्पीड के बारे में अभी भी पता लगाया जा रहा है.
इस क्षुद्रग्रह को अपोलो श्रेणी का निकट-पृथ्वी पिंड माना जाता है.नासा के अनुसार, 'इन क्षुद्रग्रहों की कक्षा सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की कक्षा से बड़ी है और इनका मार्ग पृथ्वी की कक्षा को पार करता है.'वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट सोमवार को पूर्वी समय के अनुसार शाम 5:45 बजे से इस घटना का सीधा प्रसारण करने की योजना बना रहा है.
हालांकि पृथ्वी से टकराने की संभावना बहुत कम है. लेकिन अगर इसके खतरों को मापा जाए तो पूरा शहर तबाह कर सकता है. हालांकि वैज्ञानिकों ने इसकी आशंका बहुत कम जताई है.
एस्टेरॉयड के बारे में आप ऐसे समझ सकते हैं कि यह छोटे-छोटे चट्ठानी टुकड़े होते हैं. यह सूर्य के चक्कर लगाते हैं. दुनिया इन्हें छोटे ग्रह के नाम से भी जानती है. वैज्ञानिकों के अनुसार अधिकतर एस्टेरॉयड मंगल और बृहस्तपि की पट्टी में ही चक्कर लगाते हैं. लेकिन स्पेस में कब क्या हो जाए इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. कभी-कभी ऐसा होता है कि कुछ एस्टेरॉयड अपनी कक्षा बदल कर पृथ्वी के बहुत पास आ जाते हैं.