नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. बीजिंग में आयोजित अहम शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की खुलकर तारीफ की और दोनों देशों के रिश्तों को भविष्य के लिए बेहद अहम बताया. ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दुनिया व्यापार तनाव, ताइवान विवाद और पश्चिम एशिया की अस्थिरता जैसे मुद्दों पर नजर बनाए हुए है. इसी वजह से इस बैठक को सिर्फ कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, 'हम एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हैं. वास्तव में, हमारे दोनों देशों के बीच किसी भी राष्ट्रपति और राष्ट्रपति के बीच का यह सबसे लंबा संबंध है.'
#WATCH | Beijing | US President Donald Trump holds a bilateral meeting with Chinese President Xi Jinping.
— ANI (@ANI) May 14, 2026
US President Donald Trump says, "You and I have known each other now for a long time. In fact, the longest relationship of our two countries that any President and… pic.twitter.com/x1gR4XzPjy
उन्होंने कहा, 'हमारा तालमेल बहुत अच्छा रहा है. जब भी कोई दिक्कत आई, हमने मिलकर उसका हल निकाल लिया. मैं तुम्हें फोन करता और तुम मुझे. लोगों को पता नहीं है, जब भी हमें कोई समस्या हुई, हमने उसे बहुत जल्दी सुलझा लिया.'
मैं यह बात सभी से कहता हूं, आप एक महान नेता हैं... आपके साथ रहना मेरे लिए सम्मान की बात है; आपका मित्र होना मेरे लिए सम्मान की बात है... हम साथ मिलकर एक शानदार भविष्य बनाने जा रहे हैं.
#WATCH US President Donald Trump meets Chinese President Xi Jinping in Beijing.
— ANI (@ANI) May 14, 2026
(Source: US Network Pool via Reuters) pic.twitter.com/SQre6UpdlQ
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वे इस यात्रा पर अपने साथ 'दुनिया के सर्वश्रेष्ठ [व्यापारिक नेताओं]' को लाए हैं. उन्होंने कहा, 'आज यहां केवल शीर्ष लोग ही आपको सम्मान देने के लिए उपस्थित हैं.'
ट्रंप ने आगे कहा कि कुछ लोगों ने इसे अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन कहा है और वह उनकी चर्चाओं के लिए 'बेहद उत्सुक' हैं. ट्रंप ने अपनी चीन यात्रा के सबसे व्यस्त हिस्से की शुरुआत की, एक शिखर सम्मेलन जिसमें भव्यता और प्रतीकात्मकता की भरमार होने की उम्मीद है, लेकिन व्यापार, ताइवान के साथ अमेरिकी संबंध या ईरान में युद्ध जैसे प्रमुख मुद्दों पर बड़ी सफलता मिलने की संभावना नहीं है.