नई दिल्ली: अमेरिका ने वैश्विक व्यापार में एक बार फिर अपनी सख्ती दिखाई है. ट्रंप सरकार ने Section 301 के तहत दो अलग-अलग जांचों की शुरुआत की है-एक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता पर और दूसरी जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात पर. इस फैसले से भारत, चीन, यूरोपीय संघ जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर नए टैरिफ और जुर्माने का खतरा मंडरा रहा है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पहले के टैरिफ को खारिज करने के बाद यह नया प्रयास है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन में तनाव बढ़ सकता है और कई देशों के निर्यात प्रभावित हो सकते हैं.
पहली जांच जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता पर है, जिसमें भारत के अलावा चीन, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, ताइवान, वियतनाम, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं. अमेरिका का कहना है कि चीन की इलेक्ट्रिक वाहन क्षमता घरेलू मांग से कहीं ज्यादा है. जर्मनी और आयरलैंड के बड़े व्यापार अधिशेष को भी अतिरिक्त क्षमता का प्रमाण बताया गया है. कनाडा को इस जांच से बाहर रखा गया है.
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिकी नौकरियों की रक्षा और निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करना जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर समस्या हल नहीं हुई तो टैरिफ लगाए जाएंगे. ग्रीर के मुताबिक गर्मियों तक चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको जैसे देशों पर नए टैरिफ आ सकते हैं. टैरिफ अलग-अलग देशों के लिए अलग हो सकते हैं, लेकिन अभी इसकी डिटेल नहीं बताई गई है.
दूसरी जांच जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात पर है, जो लगभग 60 व्यापारिक साझेदार देशों को प्रभावित करेगी. अमेरिका पहले से ही पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा हस्ताक्षरित ‘उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट’ के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई कर रहा है. अब यह जांच अन्य देशों तक बढ़ाई जा सकती है. ग्रीर ने बताया कि यह जांच कल दोपहर के बाद किसी भी समय शुरू हो सकती है और ग्लोबल सप्लाई चेन पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.
यह कदम रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बीजिंग में महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है. नई जांच का असर इस बातचीत पर भी पड़ सकता है. पुराने टैरिफ रद्द होने के बाद अमेरिका Section 301 जांचों को तेज कर रहा है. इससे वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है और भारत जैसे देशों को अपनी व्यापार नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है.
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, फार्मा और अन्य क्षेत्रों के निर्यात पर असर पड़ सकता है. अमेरिका कुछ क्षेत्रों में अतिरिक्त क्षमता का आरोप लगा रहा है. हालांकि भारत पहले से ही अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों पर चर्चा कर रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों को बातचीत से रास्ता निकालना होगा, वरना टैरिफ से सामान महंगा होगा और सप्लाई चेन में व्यवधान आ सकता है.