नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया है. अमेरिकी प्रशासन ने अपने यूरोपीय सहयोगियों को दो टूक शब्दों में कह दिया है कि रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट केवल भारत को दी जाएगी. सोमवार को जी-7 देशों की बैठक में अमेरिका ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधों में ढील केवल विशेष परिस्थितियों में भारत तक सीमित रहेगी. यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रतिबंधों में कुछ ढील देने पर विचार कर रहे हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार. ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की है. हालांकि. ट्रंप ने यह भी साफ किया है कि किसी भी प्रकार की छूट का दायरा बहुत सीमित होगा. इस बातचीत के बाद वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर नई संभावनाएं तलाशने की चर्चा तेज हो गई है.
ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते 'होर्मुज स्ट्रैट' को बंद कर दिया है. इसके कारण सऊदी अरब और इराक जैसे प्रमुख देशों से भारत आने वाला कच्चा तेल बाधित हो गया है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है. ऐसे में समुद्री रास्तों की घेराबंदी ने भारत के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. इसी संकट को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूसी तेल के लिए 30 दिनों की विशेष अनुमति दी है.
सोमवार को जी-7 के वित्त मंत्रियों की बैठक में अमेरिका का रुख यूरोपीय देशों के प्रति काफी सख्त रहा. अमेरिका ने साफ कर दिया कि भारत को दी गई यह छूट समय और भौगोलिक दायरे के लिहाज से बेहद सीमित है. यूरोपीय आयोग के अर्थव्यवस्था आयुक्त वाल्दिस डोम्ब्रोवस्किस ने पुष्टि की है कि यूरोप को ऐसी किसी छूट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. अमेरिका का मानना है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना वर्तमान परिस्थितियों में आवश्यक है, लेकिन रूस पर वैश्विक दबाव कम नहीं किया जाएगा.
मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गई थीं. तेल की इन बढ़ती कीमतों ने विकसित और विकासशील दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता बढ़ा दी है. हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप के एक हालिया बयान के बाद बाजार में थोड़ी नरमी देखी गई. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ युद्ध में जीत के करीब हैं, जिससे यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है. इस आशावादी टिप्पणी ने तेल की बढ़ती कीमतों पर आंशिक रोक लगाई है.
भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी थी. लेकिन वर्तमान युद्ध और ऊर्जा किल्लत ने समीकरण बदल दिए हैं. अमेरिका द्वारा दी गई यह नई छूट भारतीय रिफाइनरियों को सस्ती दरों पर तेल सुरक्षित करने का मौका देगी. हालांकि अंतिम निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप की विवेचना पर निर्भर करेगा. यह भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि अमेरिका ने केवल भारत को ही इस विशेष परिस्थिति में छूट के योग्य माना है.