नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान-इजरायल युद्ध अब सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खोलने और युद्ध रोकने के लिए 48 घंटे का समय दिया था. यह समय सीमा आज खत्म हो रही है. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि शक्ति से ही शांति आती है. ईरान ने साफ कहा है कि अमेरिका ने बिजली संयंत्रों पर हमला किया तो होर्मुज संकट तुरंत बंद कर दिया जाएगा. इस बीच वैश्विक तेल कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं और दुनिया में तनाव चरम पर है.
ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरान जलडमरूमध्य नहीं खोलेगा तो अमेरिका उसके ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर देगा, शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी. उन्होंने रोनाल्ड रीगन के 'शक्ति से शांति' सिद्धांत को दोहराया. ट्रंप का कहना है कि ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड देश के अधिकांश ढांचे को नियंत्रित करता है और इसका इस्तेमाल युद्ध में हो रहा है. इस अल्टीमेटम के बाद दुनिया की नजरें आज के घटनाक्रम पर टिकी हैं.
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका ने बिजली संयंत्रों पर हमला किया तो पूरे क्षेत्र के महत्वपूर्ण ढांचे को वैध निशाना माना जाएगा. इसमें खाड़ी देशों के पानी शोधन संयंत्र भी शामिल हैं. ईरान ने होर्मुज संकट को तुरंत बंद करने की धमकी दी है. ईरान ने इजराइल के गुप्त परमाणु स्थल पर मिसाइल हमला किया, जिसमें कई लोग घायल हुए. ईरान में अब तक 2000 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं.
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है. दुनिया का 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है. ईरान ने कहा कि शत्रु देशों के अलावा अन्य जहाजों को गुजरने की इजाजत है, लेकिन हमलों से टैंकर यातायात लगभग रुक गया है. कुवैत, यूएई और बहरीन में मिसाइल-ड्रोन हमलों से निपटने के लिए हवाई रक्षा सक्रिय है. तेल कीमतों में भारी उछाल से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमले में जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, जो चमत्कार है. उन्होंने दावा किया कि इजरायल और अमेरिका ईरान के परमाणु, मिसाइल कार्यक्रम और सशस्त्र समर्थन को कमजोर करने में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. उनका लक्ष्य ईरान की जनता को धार्मिक शासन के खिलाफ खड़ा करना भी है. लेकिन ईरान में अभी तक कोई विद्रोह नहीं दिखा. युद्ध अब चौथे हफ्ते में है और खतरा लगातार बढ़ रहा है.