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ईरान-US के बीच 21 घंटे तक चली बातचीत बेनतीजा, क्या फिर शुरू हो जाएगी जंग या अभी भी बचा है कोई विकल्प?

पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता विफल हो गई है. 21 घंटे तक चली बातचीत में कोई समझौता नहीं हो पाया. इसके बाद अब क्या फिर से जंग शुरू होगा या अब भी कोई रास्ता बचा है?

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Edited By: Shanu Sharma
ईरान-US के बीच 21 घंटे तक चली बातचीत बेनतीजा, क्या फिर शुरू हो जाएगी जंग या अभी भी बचा है कोई विकल्प?
Courtesy: X (@EliAfriatISR), ANI

ईरान और अमेरिका 40 दिनों तक जंग लड़ने के बाद शांति वार्ता के लिए तैयार हुए थे. पाकिस्तान द्वारा इस समझौते की मध्यस्थता की जा रही थी. इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय शांति वार्ता का आयोजन किया गया था. इस दौरान लगभग 21घंटे तक बातचीत चली, लेकिन फिर भी कोई नतीजा निकल नहीं आ पाया. इसी के साथ एक बार फिर से क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की उम्मीद जताई गई है.

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तानी मीडिया को दिए लगभग 3 मिनट के संबोधन के दौरान साफ कहा कि ईरान ने अमेरिका की तय की गई ‘रेड लाइन्स’ को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि हमने 21 घंटे तक लगातार बातचीत की, कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा कीगई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका. वेंस ने कहा कि अमेरिका ने ईमानदारी से वार्ता की, लेकिन ईरान अपनी अड़ियल रणनीति पर अडिग रहा.

शांति वार्ता फेल होने पर क्या बोला ईरान?

जेडी वेंस के बारे में शुरू से कहा जा रहा है कि वह इस जंग को खत्म करना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान तक का सफर तय किया, हालांकि इसके बाद भी जंग थमता नजर नहीं आ रहा है. ईरान की तरफ से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने वेंस से अलग रुख अपनाते हुए कहा कि वार्ता में होर्मुज स्ट्रेट, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध हटाने, युद्ध मुआवजा और क्षेत्रीय शांति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गई. उन्होंने अमेरिका पर अत्यधिक और गैरकानूनी मांगें थोपने का आरोप लगाया. बकाई ने इस वार्ता के फेल होने पर कहा कि सफलता दूसरी तरफ की ईमानदारी और संतुलन पर निर्भर करती है.

पाकिस्तान की कोशिश क्यों हुई फेल?

मिल रही जानकारी के मुताबिक वार्ता में सबसे बड़ा पेच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना. इस रास्ते के प्रभावित होने के कारण पूरी दुनिया में उथल-पुथल है. इस मार्ग पर अमेरिका पूर्ण स्वतंत्रता चाहता है, जबकि ईरान अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है. वहीं ईरान ने चेतावनी भी दी है कि जबतक कोई साझा समझौता नहीं होता है तब तक इस रास्ते की स्थिति नहीं बदलने वाली है. इसके अलावा दोनों देशों के बीच शांति वार्ता सफल ना होने के पीछे दूसरा प्रमुख मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम बताया जा रहा है. अमेरिका ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित या समाप्त करने की मांग कर रहा है, जबकि ईरान इसे अपना संप्रभु अधिकार मानता है.

क्या अब भी है कोई दूसरा ऑप्शन ?

ईरान का कहना है कि वह परमाणु बम नहीं बनाएगा, लेकिन यूरेनियम संवर्धन जारी रखेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता के फेल होने पर साफ कहा  कि चाहे डील हो या न हो, अमेरिका के लिए कोई फर्क नहीं पड़ता. हम हर हाल में जीतेंगे. दोनों देशों के बीच यह वार्ता फेल हो गई लेकिन इसके बावजूद कूटनीतिक दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने अपना अंतिम प्रस्ताव रख दिया है और अब ईरान को फैसला करना है. यदि दोनों पक्ष थोड़ी नरमी दिखाएं तो भविष्य में नई वार्ता हो सकती है. अगर ईरान इस प्रस्ताव को नहीं मानता है तो जंग की गति फिर से तेज हो सकती है.