menu-icon
India Daily

तालिबान ने अमेरिका को दिया 1 खरब डॉलर के खजाने का ऑफर, मगर रख दी ये शर्त

तालिबान ने प्रतिबंध हटाने और जब्त संपत्ति की वापसी के बदले अमेरिका को अफगानिस्तान के 1 खरब डॉलर मूल्य के खनिज संसाधनों में निवेश का औपचारिक प्रस्ताव दिया है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
तालिबान ने अमेरिका को दिया 1 खरब डॉलर के खजाने का ऑफर, मगर रख दी ये शर्त
Courtesy: @MarioNawfal

तालिबान सरकार ने अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान ने अमेरिकी निवेशकों को अफगानिस्तान के लगभग 1 खरब डॉलर के विशाल खनिज खजाने में निवेश करने का न्योता दिया है. इसके बदले तालिबान ने वॉशिंगटन से अपने ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाने और विदेश में जब्त पड़े अरबों डॉलर के अफगान फंड को जारी करने की मांग की है.

पिछली दुश्मनी भूलने की अपील

तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने कहा कि अफगानिस्तान खनन, बुनियादी ढांचे, कृषि और व्यापार जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी निवेश का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को पिछले 20 वर्षों के युद्ध के चश्मे से देखने के बजाय भविष्य के सहयोग पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. अमेरिका और पूर्व अफगान सरकार के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों के मुताबिक, देश में लिथियम, तांबा, लोहा, सोना, कोबाल्ट और नाइओबियम के समृद्ध भंडार मौजूद हैं.

विदेशी निवेश और बदहाल अर्थव्यवस्था

वर्ष 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान ने चीन और ईरान जैसे देशों के साथ 7 अरब डॉलर से अधिक के खनन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके बावजूद, अफगानिस्तान दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बना हुआ है और देश की करीब एक-तिहाई आबादी (1.4 करोड़ से अधिक लोग) गंभीर भुखमरी का सामना कर रही है. वहीं, महिलाओं की शिक्षा और रोजगार पर कड़े प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय तालिबान पर लगातार दबाव बनाए हुए है.

फ्रीज संपत्ति और बगराम एयर बेस विवाद

अफगानिस्तान का लगभग 9.5 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बाहर अटका हुआ है, जिसमें से करीब 7 अरब डॉलर अकेले अमेरिका में जमा हैं. तालिबान ने इन संपत्तियों को तुरंत बहाल करने की मांग की है. दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने काबुल के पास स्थित ऐतिहासिक बगराम एयर बेस को वापस अमेरिका के नियंत्रण में लेने की इच्छा व्यक्त की है. हालांकि, तालिबान ने इस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए बगराम को अपनी राष्ट्रीय संपत्ति करार दिया है.