नई दिल्ली: सितंबर में मानसून की चाल कमजोर रहने की संभावना है. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने सोमवार को अपने मासिक पूर्वानुमान में देशभर में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया. विभाग के मुताबिक, सितंबर में बारिश दीर्घकालिक औसत की 91 प्रतिशत से भी कम रह सकती है. इसके साथ ही महीने का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है. बारिश की कमी का असर खेती पर पड़ सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां मिट्टी में नमी पहले ही घट रही है.
IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि सितंबर में पूरे देश की बारिश सामान्य से नीचे रहने की संभावना है. सितंबर का दीर्घकालिक औसत करीब 167.9 मिलीमीटर है, जिसकी गणना 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर की गई है. विभाग के अनुसार देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश की कमी रह सकती है. हालांकि पूर्वी, पूर्वोत्तर और मध्य भारत के कुछ इलाकों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रहने का अनुमान है.
बारिश की असमान स्थिति अब किसानों के लिए बड़ी चिंता बन रही है. पूर्व और उत्तर के प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में पहले से बारिश की कमी दर्ज की जा रही है. पश्चिम और दक्षिण के गन्ना क्षेत्रों तथा सोयाबीन उत्पादक इलाकों में भी नमी का दबाव है. सितंबर में सूखापन जारी रहा तो फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है. इसका असर आने वाले समय में प्रमुख खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर भी पड़ सकता है.
कृषि मंत्रालय के 28 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार धान और मक्का की बुवाई पिछले साल की तुलना में पीछे चल रही थी. तिलहन और गन्ने की बुवाई भी कुछ कम रही. खेती के लिए सितंबर की मिट्टी में पर्याप्त नमी बेहद जरूरी मानी जाती है. यही नमी मौजूदा फसल के विकास के साथ अगली फसल की तैयारी में भी मदद करती है. लंबे समय तक बारिश कम रहने पर दोनों फसल चक्र प्रभावित हो सकते हैं.
इस साल मानसून की शुरुआत भी कमजोर रही थी. जून में देश में 12 वर्षों की सबसे कम बारिश दर्ज की गई. जुलाई में स्थिति सुधरी, लेकिन अगस्त में फिर बारिश कमजोर पड़ गई. अगस्त की बारिश सामान्य से 16.3 प्रतिशत कम रही. ऐसे में सितंबर का पूर्वानुमान किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है. यदि महीने में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो कई क्षेत्रों में मिट्टी की नमी और जल उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है.
बारिश की कमी के साथ सितंबर में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान भी IMD ने जताया है. कम बारिश और ज्यादा गर्मी का मेल फसलों के लिए चुनौती बढ़ा सकता है. खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले से नमी की कमी है, वहां फसल विकास पर दबाव बढ़ने की आशंका है. अब किसानों और कृषि क्षेत्र की नजर सितंबर में होने वाली वास्तविक बारिश पर रहेगी, क्योंकि इसका असर मौजूदा खरीफ फसल और आगामी रबी सीजन दोनों पर पड़ सकता है.