नई दिल्ली: टीवी के मशहूर अभिनेता और शक्तिमान के किरदार से पहचान बनाने वाले मुकेश खन्ना एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने CJP से जुड़े छात्र प्रदर्शन और झारखंड में हुए विरोध प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. पेपर लीक के खिलाफ छात्रों की चिंता को उन्होंने जायज बताया, लेकिन आंदोलन के हिंसक और राजनीतिक रूप लेने पर सवाल उठाए. खन्ना ने दावा किया कि कुछ बाहरी तत्व और विदेशी ताकतें ऐसे आंदोलनों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकती हैं.
मुकेश खन्ना ने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा गंभीर है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि दशकों पहले भी परीक्षाओं से जुड़े ऐसे मामले सामने आते थे. उनके मुताबिक, तब भी जिम्मेदार लोगों को पकड़ा जाना चाहिए था और आज भी यही होना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि पेपर लीक के लिए सीधे शिक्षा मंत्री या प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराना किस हद तक उचित है.
अभिनेता ने कहा कि छात्र आंदोलन में शिक्षा व्यवस्था के व्यापक ढांचे और पढ़ाई की गुणवत्ता पर अपेक्षाकृत कम चर्चा हुई. उनके अनुसार, विरोध का केंद्र मुख्य रूप से पेपर लीक बन गया. खन्ना का कहना था कि अगर छात्र शिक्षा सुधार की मांग करते हैं तो यह महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन किसी अपराध के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करना भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने कहा कि असली मुद्दे से भटककर आंदोलन को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए.
मुकेश खन्ना ने दावा किया कि कुछ प्रदर्शनों में ऐसे लोग शामिल हो गए जो मूल छात्र आंदोलन का हिस्सा नहीं थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के पीछे बाहरी देशों से आर्थिक मदद और फंडिंग हो सकती है. हालांकि, इन दावों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया. उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने का जिक्र करते हुए कहा कि हिंसा करने वालों को केवल छात्र प्रदर्शनकारी मानना सही नहीं होगा.
खन्ना के मुताबिक, पेपर लीक से प्रभावित छात्रों की चिंता एक मानवीय मुद्दा थी, लेकिन धीरे-धीरे इसे राजनीतिक बहस में बदल दिया गया. उन्होंने कहा कि छात्रों का सवाल यह होना चाहिए था कि पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी. उनके अनुसार, आंदोलन का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक माहौल बनाने के लिए किया गया. खन्ना ने कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोगों और आंदोलन से लाभ उठाने वालों के बीच फर्क समझना जरूरी है.
मुकेश खन्ना ने कहा कि बाद में उन्हें लगा कि आंदोलन के पीछे किसी तरह की योजनाबद्ध गतिविधि हो सकती है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें छात्र असंतोष का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए करती हैं. अभिनेता ने दूसरे क्षेत्रों में हुए आंदोलनों का भी उल्लेख करते हुए अपनी आशंका जाहिर की. हालांकि, उनके ये बयान और आरोप उनकी व्यक्तिगत राय और दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है.