दिल्ली में हुई बारिश के दौरान मां और बेटे की मौत नाले में डूबकर हो गई थी. इस केस की सुनवाई हाई कोर्ट में हुई तो अदालत ने दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई. हाई कोर्ट ने यह तक कह दिया कि आप सर्विस के लायक नहीं हैं, आपको जेल भेज देना चाहिए. दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर के बाद मयूर विहार इलाके में हुई इस तरह की घटना के चलते हाई कोर्ट ने पूछा कि आखिर कितनी मौतों के बाद आप लोगों को समझ आएगा कि काम करना है. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के सामने एमसीडी और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधिकारी यही बताते रहे कि फलां काम फलां विभाग के पास है और फलां काम फलां को करना है.
दरअसल, पिछले हफ्ते हुई बारिश के बाद एक महिला अपने तीन साल के बेटे का साथ नाले में डूब गई थी जिससे दोनों की मौत हो गई थी. इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एमसीडी को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि अगर आप लोग अपनी जिम्मेदारियां निभा नहीं पाए तो आपके अधिकारियों को सस्पेंड किया जाएगा. हाई कोर्ट ने एमसीडी, डीडीए और दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि किसी की जान गई है और आप लोग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने में लगे हुए हैं.
हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बिंच ने दिल्ली पुलिस को आदेश दिए कि वह इस मामले की गहनता से जांच करे. कोर्ट ने एमसीडी के साथ जोन के डिप्टी कमिश्नर को आदेश दिया कि जहां हादसा हुआ उस नाले और उसके आसपास के कचरे को साफ किया जाए. इस मामले में अगली सुनवाई अब 22 अगस्त को होगी. इन संस्थाओं को काम करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है.
डीडीआई ने हाई कोर्ट में कहा कि उसने नालों को आरसीसी के ढक्कनों से ढका हुआ है और सफाई के दौरान इन ढक्कनों का हटाया जाता है. डीडीए ने स्वीकार किया कि जहां शव मिला वह उसके अंतर्गत आता है लेकिन जहां हादसा हुआ वह एमसीडी के अंतर्गत है. वहीं, एमसीडी लगातार यही कहती रही कि शव डीडीए वाले हिस्से में ही मिला. इस पर कोर्ट ने फटकार लगाई कि मामले की गंभीरता को समझने के लिए आप लोगों को कितनी मौतें चाहिए.
हाई कोर्ट ने एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर को फटकार लगाते हुए कहा, 'आपकी लापरवाही से दो लोगों की जान चली गई. आप यहां झूठे दावे कर रहे हैं. यह आपराधिक लापरवाही है. इसके लिए आपको जेल भेजा जाना चाहिए. आप सर्विस में रहने के लायक नहीं हैं.' इतना ही नहीं, हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि वह सरकार से कह सकती है कि एमसीडी को ही भंग कर दिया जाए. दरअसल, 31 जुलाई को हुई बारिश के बाद यह हादसा हुआ था जिसमें मां और बेटे की मौत हो गई थी.