Delhi Temperature: तापमान राजधानी दिल्ली की नींद उड़ा रहा है. दिन तो दिन रात में भी दिल्ली का तापमान लोगों की नींद उड़ा रहा है. बुधवार की रात दिल्ली का तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. बीते 60 साल में रात में यह दिल्ली का सबसे ज्यादा तापमान है. इससे पहले 10 जून 1964 में राजधानी दिल्ली में रात में तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. 2024 से पहले 3 जून 2000 को दिल्ली में रात का तापमान 34.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था.
मंगलवार की रात दिल्ली में रात का तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. यह पिछले 6 साल में सबसे ज्यादा था. राजधानी में रात में हो रही तापमान में बढ़ोतरी के क्या कारण हैं. आइए एक्सपर्ट्स से समझने की कोशिश करते हैं. जून के महीने में दिल्ली में लगातार दिनों तक रात बहुत गर्म रही है. 12 मई के बाद तापमान 40 डिग्री से नीचे आ नहीं रहा है. भारतीय मौसम विभाग ने बताया है कि 1969 के पहले के रिकॉर्ड का विश्लेषण नहीं किया गया है.
दिल्ली में रात के बढ़ते तापमान पर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट के सस्टेनेबल हैबिटेट प्रोग्राम के प्रोग्राम डायरेक्टर रजनीश सरीन ने कहा कि बड़े शहरों में कार्य तेजी से हो रहा है. इसकी वजह से शहर का कांक्रीटीकरण तेज गति के साथ बढ़ रहा है. बड़ी-बड़ी इमारतें दिन में सूरज की रौशनी को सोख लेती है और रात को वह गर्मी छोड़ती हैं. इसी कारण रात में दिल्ली समेत अन्य बड़े शहरों में तापमान बढ़ रहा है.
दूसरा बड़ा कारण है कि गाड़ियों से निकलने वाला प्रदूषण. यह भी गर्मी को बढ़ाने में एक अहम कारण हैं. इसकी वजह से रात के तापमान में बढ़ोतरी हुई है. आज के समय में आपको हर घर में एसी मिल जाएगी. एसी जितना ठंडा करता है उसे चलाने में जो हीट निकलती है वो कहीं न कहीं पर्यावरण को गर्म करके प्रदूषित करती है.
इसके साथ पेड़ों की कटाई भी बढ़ती गर्मी का एक कारण रहा है. एक डाटा के अनुसार दिल्ली में पिछले 3 सालों में हर घंटे 3 पेड़ों को काटा गया. तीन साल (2019 से 2022) में कुल 77420 पेड़ काटे गए हैं.
दिल्ली समेत मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु में हीट वेब संकट पर की गई स्टडी में पाया गया कि बीते कुछ सालों में इन शहरों में कंकरीटाइजेशन तेजी के साथ बढ़ा है.
दिल्ली समेत 5 बड़े महानगरों में रात में ह्यूमिडिटी में 5 फीसदी से लेकर 10 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है . तापमान के इस बड़े संकट से निपटने के लिए सरकारी एजेंसियों को रणनीति बनाने का काम करना होगा.