नई दिल्ली: ईरान की राजनीति और सुरक्षा नीति के अहम चेहरे अली लारीजानी की एक हवाई हमले में मौत हो गई है. मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को इस घटना ने नया मोड़ दे दिया है. तेहरान के पास उनकी बेटी के घर पर हुए इस हमले में उनके बेटे समेत कई करीबी लोग भी मारे गए. ईरानी अधिकारियों ने इस घटना की पुष्टि करते हुए इसे देश के लिए बड़ा नुकसान बताया है. इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता और गहरा गई है.
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पूर्व प्रमुख लारिजानी की मौत को देश की नेतृत्व संरचना के लिए गंभीर झटका माना जा रहा है. उनके साथ उनके बेटे मोर्तेजा, सुरक्षा उप प्रमुख और कई सुरक्षाकर्मी भी मारे गए. यह हमला तेहरान के पास परदिस इलाके में हुआ. ईरानी मीडिया ने इसे 'शहादत' बताते हुए उनकी सेवाओं को याद किया है. इस घटना ने पहले से चल रहे संघर्ष को और तीखा बना दिया है.
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने दावा किया कि यह हमला उनके देश की रणनीतिक कार्रवाई का हिस्सा था. उन्होंने कई ईरानी नेताओं के मारे जाने की बात कही है. वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया कि ऐसे हमले आगे भी जारी रहेंगे. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों का भी जिक्र सामने आया है, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं.
लारिजानी ईरान की परमाणु नीति के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते थे. 2005 से 2007 के बीच उन्होंने परमाणु वार्ताओं का नेतृत्व किया और पश्चिमी देशों के दबाव का खुलकर विरोध किया. उनका मानना था कि ईरान को अपने अधिकारों से समझौता नहीं करना चाहिए. वे रूस और चीन के साथ मजबूत संबंधों के समर्थक रहे और अमेरिका के साथ बातचीत के लिए भी रणनीतिक सलाह देते रहे.
एक प्रभावशाली परिवार से आने वाले लारिजानी ने संसद अध्यक्ष समेत कई अहम पद संभाले. उन्हें ईरान की सत्ता का 'इनसाइडर' माना जाता था. हालांकि, हाल के वर्षों में उनकी पकड़ कुछ कमजोर हुई थी. उनकी मौत से नेतृत्व में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है, जबकि आम नागरिक लगातार हमलों के बीच असुरक्षा महसूस कर रहे हैं.