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महाराष्ट्र लोकसभा में क्यों मिली महायुति को हार? 10 दिन बाद इस मुद्दे पर बोले अजित पवार

Ajit Pawar on LS Polls Failure: हाल ही में समाप्त हुए 18वें लोकसभा के लिए मतदान के नतीजों ने सत्तारूढ़ एनडीए सरकार को चौंकाने का काम किया, खासतौर से बीजेपी को जो कि इन चुनावों में 400 से ज्यादा सीटें जीतने का सपना लिए उतरी थी हालांकि उसे 292 पर ही संतोष करना पड़ा. लोकसभा चुनाव के नतीजों में एनडीए को यूपी, राजस्थान और महाराष्ट्र में काफी खराब नतीजे देखने को मिले जिसके चलते उनका गठबंधन 300 के आंकड़े को भी पार नहीं कर सका.

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Ajit Pawar NCP
Courtesy: IDL

Ajit Pawar on LS Polls Failure: लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के 10 दिन बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार ने प्रदेश में सत्तारूढ़ महायुति के खराब प्रदर्शन पर अपनी चुप्पी तोड़ी और बताया कि लोकसभा चुनावों में इस गठबंधन को इतने खराब नतीजों का सामना क्यों करना पड़ा. 

प्याज के चलते नहीं बनी बात?

शुक्रवार को अजित पवार ने इस मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि प्याज उत्पादकों में असंतोष ने हाल के लोकसभा चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति के खराब प्रदर्शन में योगदान दिया. 

अजित पवार ने कहा, 'जब हम हाल ही में 3-4 दिनों के लिए दिल्ली में थे, तो हमने पीयूष गोयल, अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेताओं से इस बारे में बात की और चर्चा की कि प्याज की कीमतों से जुड़े मुद्दों ने चुनाव में हमें कैसे प्रभावित किया है. प्याज की पैदावार करने वाले किसानों में बड़ा असंतोष था और हमने लोकसभा चुनाव में इसकी कीमत चुकाई.' 

केंद्र से लगातार की मांग पर उन्होंने नहीं सुनी

उन्होंने आगे बात करते हुए कहा, 'हम लगातार केंद्र से कह रहे थे कि हमें कुछ ऐसा करने की जरूरत है जिससे उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को फायदा हो. यह हमारी लंबे समय से मांग थी कि प्याज के उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को फायदा पहुंचाने के लिए कुछ किया जाए. मुझे लगता है कि अब हमारी मांग पर विचार किया गया है.' 

उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों में प्याज के मुद्दे की अहमियत भी जताई और कहा, 'लोकसभा चुनाव के दौरान, अगर आप रावेर और जलगांव को छोड़कर उत्तर महाराष्ट्र में देखें, तो हमें नुकसान उठाना पड़ा है. प्याज उत्पादक मुख्य रूप से पुणे, अहमदनगर, नासिक और सोलापुर में हैं. इसलिए प्याज की कीमतों से जुड़े मुद्दों का समाधान होना चाहिए.'

NAFED और RSS पर टिप्पणी करने से किया इंकार

केंद्र सरकार द्वारा NAFED को बंद करने और इसके सभी अधिकार वाणिज्य मंत्रालय को सौंपने के फैसले पर उनके विचार पूछे जाने पर पवार ने कहा, "मैं इस बारे में पूरी जानकारी मिलने के बाद ही कुछ कह सकता हूं." अजित पवार ने आरएसएस के मुखपत्र पत्रिका 'ऑर्गनाइजर' में एनसीपी के बारे में की गई टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी. 

उन्होंने कहा,'मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता. आप मुझसे मेरे बारे में पूछें. परिणाम के बाद बहुत से लोग टिप्पणी कर रहे हैं. लोकतंत्र में सभी को टिप्पणी करने का अधिकार है, लेकिन मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता. मुझसे केवल विकास के बारे में पूछें. मेरा ध्यान इसी पर है. मैं महायुति के रूप में नई उम्मीद के साथ आगामी चुनाव में उतरूंगा.'

जोड़-तोड़ की राजनीति से बीजेपी को हुआ नुकसान

आरएसएस से जुड़ी पत्रिका 'ऑर्गनाइजर' के ताजा अंक में एक लेख में कहा गया है कि महाराष्ट्र अनावश्यक राजनीति और टाले जा सकने वाले जोड़-तोड़ का एक प्रमुख उदाहरण है और भाजपा ने एनसीपी ( अजित पवार ) से हाथ मिलाकर इसका महत्व कम कर दिया है. 

भाजपा ने हाल ही में संपन्न संसदीय चुनाव में जिन 29 सीटों पर चुनाव लड़ा था, उनमें से नौ पर जीत हासिल की थी, जबकि उसके 'महायुति' सहयोगी अजित पवार की एनसीपी को आवंटित चार सीटों में से केवल एक ही सीट मिली थी.

महाराष्ट्र 48 सीटों के साथ लोकसभा क्षेत्रों के मामले में दूसरा सबसे बड़ा राज्य है. यहां 19 और 26 अप्रैल तथा 7, 13 और 20 मई को पांच चरणों में मतदान हुआ. भाजपा ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की एनसीपी वाले एनडीए के महायुति गठबंधन के साथ 2024 के लोकसभा चुनाव में 17 सीटें जीतीं.