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राजा रवि वर्मा की 'यशोदा और कृष्ण' बनी भारत की सबसे महंगी पेंटिंग, साइरस पूनावाला ने इतने करोड़ में खरीदा

भारत की कला दुनिया में नया रिकॉर्ड उस समय बना जब 'यशोदा और कृष्ण' पेंटिंग रिकॉर्ड 167.2 करोड़ रुपये में बिकी. इसे साइरस पूनावाला ने खरीदा, जो वैक्सीन उद्योग के बड़े नाम और देश के प्रमुख उद्योगपति हैं.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
राजा रवि वर्मा की 'यशोदा और कृष्ण' बनी भारत की सबसे महंगी पेंटिंग, साइरस पूनावाला ने इतने करोड़ में खरीदा
Courtesy: X

भारतीय कला बाजार ने एक ऐतिहासिक पल देखा जब मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा की पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ 167.2 करोड़ रुपये में नीलाम हुई. यह अब तक की सबसे महंगी भारतीय पेंटिंग बन गई है. इस अनमोल कलाकृति को खरीदने वाले हैं साइरस एस पूनावाला, जो भारत के वैक्सीन उद्योग के बड़े नाम हैं. इस खरीद ने कला और बिजनेस दोनों दुनिया में नई चर्चा छेड़ दी है.

कौन हैं साइरस पूनावाला

साइरस पूनावाला भारत के जाने-माने उद्योगपति हैं. उन्होंने 1966 में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की स्थापना की, जो आज दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी बन चुकी है. उनकी पहचान हेल्थकेयर सेक्टर के टॉप अरबपतियों में होती है. हाल के वर्षों में उनकी संपत्ति लगातार बढ़ी है, जिससे वे देश के सबसे अमीर लोगों की सूची में शामिल हैं.

 वैक्सीन दुनिया में बड़ा नाम

कोविड-19 महामारी के दौरान सीरम इंस्टीट्यूट ने कोविशील्ड वैक्सीन बनाकर अहम भूमिका निभाई. यह वैक्सीन देशभर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुई. पूनावाला को उनके योगदान के लिए पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे बड़े सम्मान मिल चुके हैं. उनकी कंपनी ने ग्लोबल हेल्थ में भारत की पहचान स्थापित की है.

 रिकॉर्ड तोड़ पेंटिंग की कहानी

‘यशोदा और कृष्ण’ 1890 के दशक की एक ऑयल पेंटिंग है, जो मां और बच्चे के भावनात्मक रिश्ते को दर्शाती है. यह पेंटिंग 80 करोड़ रुपये के अनुमान से कहीं ज्यादा कीमत पर बिकी. इसने पुराने रिकॉर्ड को 40 फीसदी से ज्यादा अंतर से पीछे छोड़ दिया, जो भारतीय कला बाजार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. इस पेंटिंग ने भारत की अब तकी सबसे महंगी पेंटिंग एमएफ हुसैन की 'ग्राम यात्रा' का रिकॉर्ड तोड़ दिया जो पिछले साल निलामी में 118 करोड़ की बिकी थी.

कला को जनता तक लाने की पहल

साइरस पूनावाला ने इस पेंटिंग को खरीदने के बाद कहा कि यह देश की धरोहर है और इसे समय-समय पर लोगों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा. उनका मानना है कि ऐसी कलाकृतियों को सिर्फ निजी संग्रह तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि आम लोगों तक पहुंचाना जरूरी है.