Delhi News: जब से केंद्र में तीसरी बार नरेंद्र मोदी की सरकार बनी है तब से वह विपक्ष के संविधान बदलने के आरोपों पर अपने बचाव में लगातार आपातकाल का मुद्दा उठा रही है. राज्यसभा के एक सांसद ने तो आपातकाल के दौरान अधिकारियों द्वारा की गई ज्यादतियों पर बनी शाह कमीशन की रिपोर्ट को भी संसद के पटल पर रखने की मांग की. बीजेपी सांसद दीपक पारेख ने कहा कि सरकार को इस रिपोर्ट की एक प्रति छापनी चाहिए. उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ ने भी इस मांग का समर्थन किया. उन्होंने इसे बेहद गंभीर और जनता के महत्व का मुद्दा बताया. उन्होंने कहा, 'शाह कमीशन की रिपोर्ट ने भारतीय लोकतंत्र के काले अध्याय की जांच की थी. सरकार को इस रिपोर्ट की सच्चाई को जांचना चाहिए और इसे संसद के पटल पर रखना चाहिए.' आखिर क्या थी शाह कमीशन की रिपोर्ट आइए जानते हैं.
आपातकाल की ज्यादतियों को खोलती है यह रिपोर्ट
चुनाव में धांधली करने को लेकर इंदिरा गांधी को बतौर सांसद अयोग्य ठहरा दिया गया था. कुर्सी जाने के डर से इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को संविधान के अुच्छेद 352 का प्रयोग करते हुए पूरे देश में आपातकाल लागू कर दिया.
आपातकाल के दौरान जनता के सारे अधिकार छीन लिए गए, विरोधी नेताओं और लोगों की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गईं, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई. यह आपातकाल 2 साल तक चला. 21 मार्च 1977 को इंदिरा गांधी ने आपातकाल हटाने के साथ आम चुनाव की घोषणा कर दी.
आम चुमाव में कांग्रेस पार्टी की बुरी तरह से हार हुई और गठबंधन की जनता पार्टी की सरकार बनी जो कि केंद्र में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी. जनता पार्टी ने आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री घोषित कर दिया.
जनता पार्टी सरकार ने बनाया था शाह कमीशन
सरकार बनने के दो महीने बाद 28 माई 1977 को जनता पार्टी ने आपातकाल के दौरान जनता पर हुए जुल्म की जांच के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश जयंतीलाल छोटीलाल शाह की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी.
आपातकाल की ज्यादतियों को लेकर शाह कमीशन को कुल 48,500 शिकायतें प्राप्त हुईं जिनमें से उसने कुछ अहम मामलों पर अपनी जांच आगे बढ़ाई. कमीशन ने आपातकाल को लेकर जांच की. इस मामले में इंदिरा गांधी से भी पूछताछ की लेकिन इंदिरा ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया.
कमीशन ने सौंपी थीं तीन जांच रिपोर्ट
कमीशन ने आपातकाल को लेकर तीन जांच रिपोर्ट सौंपी, लेकिन इसी बीज गठबंधन की जनता पार्टी में कलह हो गई और 1979 में जनता पार्टी की सरकार गिर गई. जनता पार्टी की सरकार गिरते ही देश में 1980 में फिर से आम चुनाव हुए जिसमें इंदिरा गांधी ने प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की. कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में 353 सीटें जीतीं.
उसके बाद शाह कमीशन की रिपोर्ट का क्या होना था शायद यह बताने की जरूरत नहीं. इंदिरा गांधी की सरकार बनने के बाद शाह कमीशन की रिपोर्ट सरकार की प्राथमिकता नहीं रही. इस रिपोर्ट को कभी भी सदन के पटल पर नहीं रखा गया. चूंकि शाह कमीशन को केवल आपातकाल की ज्यादतियों की जांच का जिम्मा दिया गया था इसलिए वह इस रिपोर्ट को लेकर कोई कार्रवाई भी नहीं कर सकता था. अब बीजेपी चाहती है कि इस रिपोर्ट को संसद के पटल पर रखा जाएगा और आपातकाल की ज्यादतियों को जनता के सामने लाया जाए.