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India Daily

भरी सभा में सीएम सुवेंदु ने क्यों नहीं लिया ममता का नाम? 'मर्यादा' का पाठ पढ़ा कर दिया बड़ा संदेश

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधायकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी दलों से विकास के लिए साथ आने की अपील की. साथ ही उन्होंने पुरानी सरकारों की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए लोकतांत्रिक मर्यादा और सहयोग की जरूरत पर जोर दिया.

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भरी सभा में सीएम सुवेंदु ने क्यों नहीं लिया ममता का नाम? 'मर्यादा' का पाठ पढ़ा कर दिया बड़ा संदेश
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: कोलकाता के बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय विधायक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विकास, लोकतंत्र और राजनीतिक शालीनता पर विस्तार से अपनी बात रखी. उन्होंने नए विधायकों को जिम्मेदार जनप्रतिनिधि बनने का संदेश दिया और कहा कि राज्य के हित में सत्ता और विपक्ष दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है. अपने संबोधन में उन्होंने पिछली सरकारों की कार्यशैली पर भी तीखा हमला बोला, लेकिन राजनीतिक मर्यादा बनाए रखने की बात भी दोहराई.

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की प्रगति तभी संभव है जब सभी राजनीतिक दल मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के हित में काम करें. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल सरकार से नहीं, बल्कि मजबूत और जिम्मेदार विपक्ष से भी चलता है. उनके अनुसार जनता ने सभी विधायकों को अपने क्षेत्र के विकास के लिए चुना है और हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है कि वह राज्य की उन्नति में सक्रिय योगदान दे.

पुरानी सरकारों पर साधा निशाना

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि एक लंबे समय तक राज्य में फैसले सरकारी संस्थानों की बजाय राजनीतिक कार्यालयों से तय होते रहे. उन्होंने 34 वर्षों के शासन का उल्लेख करते हुए उस दौर की आलोचना की. हालांकि बाद के 15 वर्षों पर टिप्पणी करने से उन्होंने परहेज किया और कहा कि मुख्यमंत्री के पद की गरिमा को देखते हुए वे अपनी ही विधानसभा की आलोचना नहीं करना चाहते.

लोकतांत्रिक परंपराओं का किया उल्लेख

सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पहले विपक्ष के निर्वाचित प्रतिनिधियों को पर्याप्त सम्मान नहीं मिलता था. उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में सभी दलों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए. उनका दावा था कि बीते वर्षों में विपक्ष के नेताओं को कई महत्वपूर्ण अवसरों से दूर रखा गया और कई बार सदन की कार्यवाही से पहले निलंबन जैसी घटनाएं भी सामने आईं. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक भावना के अनुकूल नहीं बताया.

नए विधायकों को दिया जिम्मेदारी का संदेश

मुख्यमंत्री ने पहली बार विधानसभा पहुंचे विधायकों को सीखने और जनता के बीच सक्रिय रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन विकास के मुद्दों पर सभी को एक साथ खड़ा होना चाहिए. उनके अनुसार पश्चिम बंगाल भारत का महत्वपूर्ण राज्य है और इसे फिर से अग्रणी बनाने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को साझा प्रयास करने होंगे. उन्होंने सहयोग और संवाद की संस्कृति को मजबूत करने पर जोर दिया.

आयोजन की सराहना और इतिहास का जिक्र

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन पर मुख्यमंत्री ने संसदीय सचिव और आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार जताया. उन्होंने कहा कि इस पहल से नए विधायकों को संसदीय कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलेगा. अपने भाषण में उन्होंने बंगाल के इतिहास और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि राज्य की गरिमा और विकास राजनीति से ऊपर हैं.