भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में एक और तनाव का बिंदु जुड़ गया है. अमेरिकी दूतावास ने गुरुवार को घोषणा की कि कुछ भारतीय कारोबारी अधिकारियों और उनकी फैमिलियों के वीजा रद्द कर दिए गए हैं. इन पर आरोप है कि वे खतरनाक सिंथेटिक ड्रग फेंटानाइल के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की तस्करी से जुड़े हैं. अमेरिका का कहना है कि यह फैसला उसके नागरिकों को नशे के संकट से बचाने की बड़ी मुहिम का हिस्सा है.
नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने बयान जारी कर बताया कि जिन अधिकारियों और उनके परिवारों के वीजा रद्द किए गए हैं, वे अब अमेरिका की यात्रा के योग्य नहीं रहेंगे. दूतावास ने साफ किया कि यह कार्रवाई सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को देखते हुए की गई है. यह कदम उस समय उठाया गया जब वॉशिंगटन ने फेंटानाइल जैसी सिंथेटिक दवाओं से हो रहे नुकसान को रोकने के लिए कई देशों पर सख्ती दिखाई है.
यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद सामने आया. ट्रंप ने कहा था कि जिन देशों में ड्रग ट्रैफिकिंग और नार्कोटिक्स का उत्पादन तेजी से फैल रहा है, उन्हें अमेरिका बख्शेगा नहीं. इस सूची में भारत सहित 23 देशों को शामिल किया गया था, जिन पर अमेरिका कड़ी निगरानी रख रहा है. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि मादक पदार्थों का बढ़ता कारोबार न केवल अमेरिकी समाज को प्रभावित कर रहा है बल्कि यह वैश्विक अपराध नेटवर्क को भी मजबूत कर रहा है.
फेंटानाइल अमेरिका के लिए गंभीर संकट बन चुका है. यह सिंथेटिक ओपिऑयड बहुत कम मात्रा में भी जानलेवा साबित हो सकता है. अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, हाल के वर्षों में देश में हुई ओवरडोज मौतों में फेंटानाइल की भूमिका सबसे ज्यादा रही है. इसी वजह से अमेरिका उन सभी सप्लाई चेन पर निशाना साध रहा है, जिनसे यह ड्रग या इसके प्रीकर्सर पहुंचते हैं. भारतीय अधिकारियों पर कार्रवाई को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस कदम का असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ सकता है. जहां अमेरिका इसे ड्रग्स के खिलाफ वैश्विक मुहिम के तौर पर पेश कर रहा है, वहीं भारत के कारोबारी जगत में इसे लेकर चिंता बढ़ सकती है. भारत पहले ही अमेरिका के टैरिफ और व्यापारिक फैसलों से असहज है. अब वीजा रद्द करने का मामला दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता का नया विषय बन सकता है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर भारत सरकार की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.