Munawwar Rana dies: मशहूर शायर मुनव्वर राणा का रविवार को देर रात निधन हो गया. वे लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में भर्ती थे. उनकी उम्र 71 वर्ष थी.
मुनव्वर राणा की तबीयत पिछले कई दिनों से खराब थी. मुनव्वर राणा के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. उनके प्रशंसक उन्हें याद कर रहे हैं.
मुनव्वर राणा का जन्म 26 नवंबर 1952 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली में हुआ था. उन्होंने कई खूबसूरत कविताएँ लिखीं, जिनमें से कई मशहूर हुईं. उनकी कविताएं आम लोगों से जुड़ी हुई थीं.
#MunawwarRana का जाना महज़ जाना नहीं है
— Prashant Kanojia (@KanojiaPJ) January 14, 2024
इस तरह अदब और हिंदुस्तानी ज़ुबा को अकेला छोड़ के जाता है कोई? pic.twitter.com/84pFLo6LMt
उन्हें उर्दू साहित्य और गज़लों के लिए जाना जाता था. उनकी शायरी की सबसे खास बात ये थी कि हर कोई उसे आसानी से समझ सकता था. वे अक्सर अपनी गजलों में हिंदी और अवधी के शब्दों का इस्तेमाल करते थे, जिससे भारतीय जनता उन्हें दिल से लगा लेती थी.
उनकी सबसे मशहूर कविता "मां" थी, जो एक मां की महानता को पारंपरिक गज़ल के अंदाज में बयां करती थी.
अपने पूरे करियर में राणा को कई सम्मान मिले, जिनमें 2014 में उनकी कविता की किताब "शहदबा" के लिए प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार भी शामिल था. हालांकि, देश में बढ़ती असहिष्णुता से चिंतित होकर उन्होंने लगभग एक साल बाद यह पुरस्कार वापस कर दिया था.
थकान को ओढ़ के बिस्तर में जा के लेट गए,
— Bilal Ahmad Shabbu®️ (@Bilal_Shabbu) January 14, 2024
हम अपनी क़ब्रे मुक़र्रर में जा के लेट गए.
तमाम उम्र एक दूसरे से लड़ते रहे,
मरे तो बराबर में जाके लेट गए !!!
#MunawwarRana pic.twitter.com/xmBgQARu6T
उन्हें अमीर खुसरो अवार्ड, मीर तक़ी मीर अवार्ड, ग़ालिब अवार्ड, डॉ. जाकिर हुसैन अवार्ड और सरस्वती समाज अवार्ड भी मिले. उनके कामों का कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है.
राणा ने अपना अधिकांश जीवन कोलकाता में बिताया और भारत और विदेश दोनों में मुशायरों (काव्य सम्मेलनों) में उनकी एक खास पहचान थी.
राणा उत्तर प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रमों में भी सक्रिय थे. उनकी बेटी सुमैया समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्य हैं, जिसका नेतृत्व अखिलेश यादव करते हैं.
#अलविदा मुन्नवर राणा साहब😢🙏
— Nilesh Vats (@ImNileshVats) January 14, 2024
एक क़िस्से की तरह वो तो मुझे भूल गया,
इक कहानी की तरह वो है मगर याद मुझे।#MunawwarRana pic.twitter.com/G7DlYBGYnd
मुनव्वर राणा की विरासत केवल उनकी कविताओं तक ही सीमित नहीं है. उन्होंने अपने जीवन में जो भी सही समझा, उसके लिए लड़ने का साहस दिखाया. चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी कीमत का सामना करना पड़ा.
राणा अपने बयानों के लिए अक्सर विवादों में घिरे रहे. उन्होंने तालिबान का समर्थन करने और उसकी तुलना महर्षि वाल्मीकि से करने के साथ-साथ 2020 में पेरिस में पैगंबर मुहम्मद पर विवाद के चलते मारे गए सैमुअल पैटी की हत्या का समर्थन करने के लिए भी कई आलोचनाओं का सामना किया था.
तो अब इस गाँव से रिश्ता हमारा खत्म होता है।
— Shashank Singh (@RccShashank) January 14, 2024
फिर आँखें खोल ली जायें कि सपना खत्म होता है।।
मशहूर शायर मुनव्वर राणा का निधन 🙏#MunawwarRana #RIPMunawwarRana #Lucknow pic.twitter.com/AC4wCS0UZE
उन्होंने साल 2022 में यूपी में विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ के फिर से सत्ता में आने पर प्रदेश छोड़ने की बात कही थी. उनका कहना था कि उनके पिता पाकिस्तान नहीं जा सके लेकिन वे अपना प्रदेश, अपनी मिट्टी छोड़ देंगे.
उनके कवि दिल का एक उदाहरण पीएम नरेंद्र मोदी की मां के निधन के समय मिलता है. तब उन्होंने कहा था कि किसी की मां के निधन की खबर सुनकर ऐसा लगता है जैसे मेरी मां चली गई है. जब से पीएम की मां की खबर सुनी है तब से मेरे पास शब्द नहीं हैं. अब तो मोदी जी को और संभलकर चलना होगा क्योंकि उनके पास मां की दुआएं नहीं होंगी जो उनको बचा ले जाती थी.