नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार शाम एक दिन की आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल से हटकर स्वयं हवाई अड्डे पर जाकर उनका स्वागत किया. यह यात्रा पीएम मोदी के निमंत्रण पर हो रही है. दोनों नेताओं के बीच आज ही द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है, जिसके बाद राष्ट्रपति नाहयान स्वदेश लौट जाएंगे.
शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के आगमन पर प्रधानमंत्री मोदी का हवाई अड्डे पर पहुंचना इस यात्रा को विशेष बनाता है. इसे दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे और व्यक्तिगत संबंधों का संकेत माना जा रहा है. राष्ट्रपति नाहयान की यह यात्रा बेहद संक्षिप्त है, लेकिन इसे रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है. सीमित समय में ही उच्च स्तर की बातचीत तय की गई है.
यूएई के राष्ट्रपति बनने के बाद यह नाहयान की भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा है, जबकि पिछले दस वर्षों में वे पांचवीं बार भारत आए हैं. हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा सहयोग में तेजी आई है. सितंबर 2024 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और अप्रैल में दुबई के क्राउन प्रिंस की भारत यात्रा ने रिश्तों को नई गति दी थी.
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया गंभीर भू-राजनीतिक तनाव से गुजर रहा है. ईरान और अमेरिका के संबंधों में तल्खी बढ़ी है, गाजा में अस्थिरता बनी हुई है और यमन को लेकर क्षेत्रीय शक्तियों में मतभेद सामने आए हैं. ऐसे माहौल में भारत और यूएई के बीच संवाद को संतुलन और स्थिरता के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
हाल के महीनों में यमन के दक्षिणी हिस्से को लेकर सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं. सऊदी अरब का आरोप है कि यूएई अलग दक्षिणी राज्य की मांग करने वाले समूहों का समर्थन कर रहा है. दिसंबर 2025 में यमन में तेज सैन्य गतिविधियों के बाद क्षेत्रीय संतुलन और ज्यादा संवेदनशील हो गया.
इस जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य में यूएई का भारत के साथ करीबी संवाद बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत को एक स्थिर, भरोसेमंद और संतुलित साझेदार के रूप में देखा जाता है. व्यापार, निवेश, रक्षा उद्योग और ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी दोनों नेताओं के बीच गंभीर चर्चा होने की संभावना है. यह यात्रा भविष्य की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है.