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India Daily

केंद्र सरकार ने न्यूज चैनलों की TRP पर 4 हफ्ते के लिए लगाई रोक, इजराइल-ईरान युद्ध की सनसनीखेज कवरेज बना कारण

न्यूज चैनलों की TRP पर 4 हफ्ते के लिए रोक लगा दी गई है. सरकार ने यह आदेश सीधे तौर पर पब्लिक इंटरेस्ट यानी जनहित में जारी किया है.

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
केंद्र सरकार ने न्यूज चैनलों की TRP पर 4 हफ्ते के लिए लगाई रोक, इजराइल-ईरान युद्ध की सनसनीखेज कवरेज बना कारण
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भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज चैनलों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने 4 हफ्ते तक TRP पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है. यह अहम फैसला इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की 'सनसनीखेज' कवरेज को देखते हुए लिया गया है. मंत्रालय ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अगले चार हफ्तों तक किसी भी न्यूज़ चैनल के लिए टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स जारी न करे.

पब्लिक इंटरेस्ट में जारी आदेश

सरकार ने यह आदेश सीधे तौर पर पब्लिक इंटरेस्ट यानी जनहित में जारी किया गया है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे इस गंभीर संघर्ष की रिपोर्टिंग के दौरान कई न्यूज चैनल लगातार बेवजह सनसनीखेज और अंदाजा लगाने वाला कंटेंट दिखा रहे हैं.

MIB ने दी चेतावनी

MIB ने अपने आधिकारिक निर्देश में चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना और भ्रामक रिपोर्टिंग से देश की आम जनता के बीच पैनिक फैल सकता है. सरकार के अनुसार, इस तरह की आक्रामक कवरेज से उन लोगों में भारी चिंता और डर बढ़ सकता है, जिनके दोस्त और परिवार के सदस्य इन युद्ध प्रभावित इलाकों में रह रहे हैं.

चैनलों के बीच चल रही TRP की अंधी होड़

अधिकारियों के मुताबिक, इस सख्त कदम के पीछे का मुख्य कारण न्यूज चैनलों के बीच चल रही TRP की अंधी होड़ है. अधिकारियों ने बताया कि रेटिंग्स को कुछ समय के लिए रोकने का असल मकसद ऐसे बेहद संवेदनशील जियोपॉलिटिकल हालातों में ज्यादा व्यूअरशिप बटोरने की चाहत में होने वाले कॉम्पिटिटिव सेंसेशनलिज्म को खत्म करना है.

वीकली रिलीज ठप

इस बड़े फैसले का सीधा और व्यापक असर पूरी न्यूज ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री और विज्ञापन जगत पर पड़ना तय है. इस सरकारी रोक के बाद न्यूज चैनलों के लिए TRP डेटा का वीकली  रिलीज अब पूरी तरह से ठप हो गया है. गौरतलब है कि इसी टीआरपी डेटा का इस्तेमाल ब्रॉडकास्टर, एडवरटाइजर और मीडिया प्लानर बड़े पैमाने पर करते हैं ताकि वे ऑडियंस शेयर और विज्ञापनों की परफॉर्मेंस को ट्रैक कर सकें.